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पूरी दुनिया में रहने लायक सबसे अच्छी जगह कौन सी है? जानें विश्व के टॉप-10 शहरों की सूची

क्या आप जानते हैं कि पूरी दुनिया में रहने लायक सबसे अच्छी जगह कौन सी है? इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट (EIU) ने ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स-2026 रिपोर्ट में रहने लायक दुनिया के टॉप-10 शहरों की जानकारी दी है।
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भारत

•

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Vinay Shakya

•

Sep 29, 2026

Most livable city in world

सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट (EIU) द्वारा जारी ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स-2026 रिपोर्ट में रहने लायक दुनिया के टॉप-10 शहरों (Top-10 City in the World) की जानकारी दी गई है। रिपोर्ट में डेनमार्क की राजधानी 'कोपेनहेगन' को दुनिया का सबसे रहने लायक शहर घोषित किया गया है। EIU ने अपनी रिपोर्ट में कुल 173 शहरों का मूल्यांकन किया। दुनिया के टॉप-10 शहरों में डेनमार्क की राजधानी 'कोपेनहेगन' पहले पायदान पर है। किन पैरामीटरों के आधार पर 'कोपेनहेगन' को विश्व के टॉप-10 शहरों में पहले स्थान मिला है और भारतीय शहरों की क्या स्थिति है? आइए जानते हैं…

मूल्यांकन रिपोर्ट में स्थिरता (स्टेबिलिटी), स्वास्थ्य सेवाएं (हेल्थकेयर), शिक्षा (एजुकेशन), संस्कृति एवं पर्यावरण (कल्चर एंड एनवायरनमेंट) तथा बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) जैसे 5 प्रमुख पैरामीटरों के आधार पर स्कोरिंग की गई। डेनमार्क के 'कोपेनहेगन' शहर को इनमें से 3 श्रेणियों में पूर्ण 100 अंक प्राप्त मिले हैं और कुल स्कोर 98 रहा। इस स्कोर के साथ 'कोपेनहेगन' शहर को शीर्ष स्थान मिला है।

विश्व के टॉप-10 शहरों का क्रम

विश्व के सबसे अच्छे टॉप-10 रहने लायक शहरों में ऑस्ट्रिया की राजधानी 'वियना' दूसरे स्थान पर रही, जबकि ऑस्ट्रेलिया का 'मेलबर्न' तीसरे स्थान पर है। टॉप-10 शहरों में पश्चिमी यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, स्विट्जरलैंड और जापान के शहरों का दबदबा रहा। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया का सिडनी-4, स्विट्जरलैंड का ज्यूरिख- 5, जिनेवा- 6, जापान का ओसाका-7, एडिलेड- 8, वैंकूवर-9 और टोक्यो-10 नंबर पर है।

भारतीय शहरों की स्थिति चिंताजनक

ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स-2026 रिपोर्ट में भारतीय शहरों की स्थिति चिंताजनक रही। नई दिल्ली-120, मुंबई-121, चेन्नई- 123 और बेंगलुरु- 127वें स्थान पर रहा। रिपोर्ट में केवल 4 भारतीय शहरों को शामिल किया गया। पिछले साल की तुलना में नई दिल्ली और मुंबई की रैंकिंग में कोई बदलाव नहीं हुआ है। वहीं, चीन के कई शहरों में पिछले वर्ष की तुलना में सुधार हुआ है, जबकि भारत के बड़े महानगर प्रदूषण, ट्रैफिक और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझते नजर आए।

भारतीय शहरों का प्रदर्शन

नई दिल्ली ने शिक्षा में 66.7 अंक, इंफ्रास्ट्रक्चर में 58.9, स्थिरता में 50, स्वास्थ्य सेवाओं में 41.7 और संस्कृति-पर्यावरण में 35.4 अंक प्राप्त किए। मुंबई को शिक्षा में 58.3, इंफ्रास्ट्रक्चर में 51.8, स्थिरता में 60, स्वास्थ्य में 41.7 और संस्कृति-पर्यावरण में 33.3 अंक मिले। हालांकि, दोनों शहरों ने शिक्षा क्षेत्र में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन वायु प्रदूषण, ट्रैफिक जाम, आवास की कमी, पानी-बिजली की समस्या और स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि भारत के बड़े शहरों की आबादी और आर्थिक गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं, लेकिन बुनियादी ढांचे का विकास इस गति से मेल नहीं खाता है। इसलिए लिवेबिलिटी स्कोर प्रभावित हुआ है।

सबसे कम रहने लायक शहर

रिपोर्ट के निचले पायदान पर युद्ध प्रभावित और अस्थिर शहर हैं। सीरिया की राजधानी दमिश्क सबसे निचले स्थान पर है। त्रिपोली (लीबिया), ढाका (बांग्लादेश), कराची (पाकिस्तान), अल्जीयर्स, लागोस (नाइजीरिया), पोर्ट मोरेस्बी, कीव (यूक्रेन) और हरारे जैसे शहरों में सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, बुनियादी सुविधाएं और स्थिरता की गंभीर कमी है। इन शहरों में युद्ध, अराजकता, प्रदूषण, अपराध और आर्थिक संकट मुख्य कारण हैं।

टॉप-10 शहरों की सफलता के कारण

दुनिया के टॉप-10 शहरों में शामिल कोपेनहेगन, वियना, मेलबर्न, सिडनी-4, ज्यूरिख- 5, जिनेवा- 6, ओसाका-7, एडिलेड- 8, वैंकूवर-9 और टोक्यो की सफलता का मूल्यांकन कई चरणों में किया गया। दुनिया के टॉप-10 शहरों में शामिल होने वाले शहरों की सफलता यहां की सुरक्षा, बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाओं, विश्व स्तरीय शिक्षा, स्वच्छ पर्यावरण और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर पर आधारित है।