
court decision on sant rampal
court decision on sant rampal : शुक्रवार को डेरा सच्चा सौदा प्रमुख पर लगे साध्वियों के योन शोषण के मामले पर फैसला आना हैं लेकिन सबसे बड़ी बात है नवंबर 2014 में हिसार के सतलोक आश्रम प्रकरण में भी दो मुकदमों में बुधवार को हिसार की सेंट्रल जेल के अंदर बनाई गई स्पेशल कोर्ट में बहस पूरी हो गई है और आज इन मामलों में भी फैसला आ सकता है। इसे देखते हुए रामपाल के काफी समर्थक हिसार में जुटे हुए हैं। और डेरा सच्चा सौदा प्रमुख के समर्थक वहां डेरा जमाये बैठे है। इन्हे देख हरियाणा प्रशासन की नींद उडी हुई है।
18 नवंबर 2014 को सतलोक आश्रम के के कबीर पंथी बाबा रामपाल और अन्य लोगों के खिलाफ सरकारी ड्यूटी में बाधा पहुंचाने और रास्ता रोककर लोगों को बंधक बनाने के ये दो मामले हैं, जिनमें कोर्ट का फैसला आना है. एक मुकदमे में रामपाल समेत पांच अन्य लोग हैं वहीँ दूसरे मुकदमे में रामपाल समेत छह अन्य आरोपी हैं। इन मुकदमों की सुनवाई के लिए हिसार सेंट्रल जेल वन के अंदर ही स्पेशल कोर्ट बनाई गई। जहाँ सुनवाई चल रही है।
रामपाल कैसे बना, संत रामपाल
रामपाल ख़ुद को संत कबीर का अवतार बताते है। उनके समर्थकों के लिए वो नायक हैं मगर आलोचकों के लिए खलनायक
क़ानून की नज़र में वो फिलहाल एक अभियुक्त हैं और सलाखों के पीछे हैं।
2006 में जमीन विवाद के अंदर एक हत्या के मामले में 2008 में संत रामपाल को ज़मानत मिली थी. लेकिन उसके बाद से वे एक बार भी अदालत में पेश नहीं हुए हैं.
अगस्त 2014 में हिसार ज़िला अदालत में उनके समर्थकों ने काफ़ी हुड़दंग मचाया था. जिसके बाद पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए उन्हें अदालत में पेश होने को कहा था और पूछा था कि उनकी ज़मानत क्यों न रद्द कर दी जाए।
सोनीपत के धनाणा गांव में 1951 रामपाल का जन्म हुआ। हरियाणा सरकार के सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर थे। नौकरी करने के दौरान ही रामपाल दास सत्संग करने लगे और 'संत रामपाल' बन गए. हरियाणा सरकार ने रामपाल से नौकरी से 2000 में इस्तीफा देने को कहा. उसके बाद रामपाल ने करोंथा गांव में अपना सतलोक आश्रम बनाया. जो फ़िलहाल राज्य सरकार के क़ब्ज़े में हैं। हरियाणा में हिसार के पास बरवाला में स्थित इस आश्रम की ज़मीन को लेकर ही रामपाल पर कई आरोप लगे है.
आश्रम के बाहर रामपाल को गिरफ़्तारी से बचाने के लिए उनके हज़ारों समर्थक जमा हो गए उनमें से एक मनोज दास कहते है, "बाबा एक चमत्कारी आत्मा है जो धरती पर भगवान का स्वरूप है। कुछ लोग इन्हें फंसा रहे है पर हम खड़े रहेंगे चाहे जो भी परिस्थितियां हो। इससे पहले भी रामपाल इस्लामी विद्वान डॉ ज़ाकिर नाइक और कई अन्य धर्म गुरुओं पर अपनी टिप्पणियों को लेकर भी चर्चा में रहे। 2006 में स्वामी दयानंद पर संत रामपाल ने एक बयान दिया, जिसके बाद रामपाल और आर्य समाज के समर्थकों के बीच सतलोक आश्रम के बाहर हिंसक झड़प हुई. इसमें एक महिला की मृत्यु हुई। जिसे जमीन विवाद का बताया गया।
झड़प के बाद पुलिस ने रामपाल को हत्या के मामले में हिरासत में लिया. 22 महीने जेल में रहने के बाद वह 30 अप्रैल 2008 को रिहा हुए। रामपाल का आश्रम भी सरकार ने ज़ब्त कर लिया।
"लोग कहते थे कि चुनाव से पहले बाबा का आशीर्वाद ले लो पर मैंने मना किया क्योंकि वह अधर्मी है और सभी तरह के ग़लत काम करते हैं."
भक्तों के बीच सच्चाइयों का उजागर होना शुरू हुआ तो सामने आया की जो खीर खिलाई जाती थी वो बाबा के दुग्ध स्नान वाले दूध से बनती थी। बाद में तो आरोपों की झड़ी सी लगी रही।
Updated on:
24 Aug 2017, 3:38 PM IST
Published on:
24 Aug 2017, 3:22 PM IST
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