दरअसल, प्राधिकरण द्वारा सेक्टर-123 में ठोस कचरा प्रबंध संयंत्र बनाने का प्रस्ताव है। इसके लिए सेक्टर-123 में ही 25 एकड़ जमीन को नोटिफाइड किया गया है। इसके बाद से ही सोसाइटी, ग्रामीण व सभी राजनीतिक दल योजना का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि यहां डंपिंग ग्राउंड बना तो यहा रहे करीब डेढ़ लाख लोगों का जीना दूभर हो जाएगा। इसको लेकर एक याचिका एनजीटी में दायर की गई थी। याचिका में प्राधिकरण से एक साल पहले आरटीआई के जरिए मांगे गए जवाब को आधार बनाया गया था। यह आरटीआई का जवाब प्राधिकरण के परियोजना अभियंता समाकांत श्रीवास्तव ने 14 सितंबर 2016 को दिया था। जिसमें यह बताया गया था कि सेक्टर-123 में प्राधिकरण की ठोस कचरा प्रबंध संयंत्र की योजना को खारिज कर दिया गया है। सुनवाई के दिन प्राधिकरण ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि आरटीआई के जरिए दी गई सूचना गलत है। इसके बाद एनजीटी ने सोसाइटी के लोगों की याचिका को खारिज कर दिया। साथ ही अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्यवाही करने के आदेश जारी किए। इसी परिपेक्ष्य में प्राधिकरण सीईओ ने जांच के लिए एक समिति का गठन किया है। समिति आरटीआई का जवाब देने वाले अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही करेगी। साथ ही एक रिपोर्ट तैयार कर एनजीटी के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।