
income tax rules change : आयकर विभाग 1 अक्टूबर 2022 से अपने नियमों बदलाव करने जा रहा है। नए नियम के तहत एक अक्टूबर से सभी संस्थाओं, स्कूल, कॉलेजों, इंस्टीट्यूट्स और हॉस्पिटल को पाई-पाई का हिसाब देना अनिवार्य हो जाएगा। इन सभी को दान या चंदे में मिले पैसे का पूरा हिसाब-किताब मेंटेन करना होगा। यानी उन्हें कारपोरेट कंपनियों की तर्ज पर लेन-देन का हिसाब रखना होगा। अगर कोई नए नियम के तहत हिसाब नहीं रखेगा तो इनकम टैक्स विभाग सख्त कार्रवाई करेगा।
आयकर विभाग ने नए नियम के तहत सभी ट्रस्टों के लिए दस वर्ष तक का लेन-देन का हिसाब किताब मेंटेन करना अनिवार्य कर दिया है। टैक्स अधिवक्ता दीपक माहेश्वरी ने बताया कि 1 अक्टूबर से नया नियम यानी 17एए लागू होने के बाद आयकर विभाग संस्थानों से किसी भी बीते वर्ष के आय-व्यय का हिसाब मांग सकता है, जिसे उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। वहीं, यदि किसी केस में विभाग की ओर से धारा 147 में नोटिस जारी होता है तो ऐसे में 10 साल तक रिकॉर्ड रखने की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि केस की समाप्ति तक रिकॉर्ड रखना होगा।
बढ़ेगा खर्च, समाप्त हो सकती है छूट
उन्होंने बताया कि अब संस्थाओं के लिए वित्तीय रिकॉर्ड रखना मुश्किल होगा, क्योंकि इसके लिए उन्हें अतिरिक्त खर्च भी वहन करना होगा। उन्होंने बताया कि ट्रस्टों को आयकर विभाग से छूट मिलती है, लेकिन अगर रिकॉर्ड मेंटेन नहीं मिला तो छूट समाप्त हो सकती है।
ये रिकॉर्ड रखना अब अनिवार्य
- प्रत्येक ट्रस्ट, स्कूल, कॉलेज, इंस्टीट्यूट, हॉस्पिटल और यूनिवर्सिटी को कैश बुक, लेजर, जनरल के साथ रोजाना हर भुगतान की रसीद रखनी होगी।
- दान की राशि और दान देने वाले का पेन कार्ड और आधार नंबर भी रखना होगा।
- ट्रस्ट उधार के लेन-देन का रिकॉर्ड भी रखेंगी।
- ट्रस्ट या धार्मिक-परमार्थ संस्थान सुधार, मरम्मत के बिल आदि के रिकॉर्ड भी रखेंगे।
- स्कूल, कॉलेज और हॉस्पिटल के लिए आय और घाटा छिपाना आसान नहीं होगा।
Published on:
28 Sep 2022, 3:22 PM IST
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