
नोएडा। गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव के बाद अब कैराना सीट पर राजनीतिक दलों की निगाहें टिक गई हैं। भाजपा सांसद हुकुम सिंह के निधन के बाद खाली हुई इस सीट को बचाना भाजपा के लिए बड़ी चुनौती है, वहीं सपा अौर बसपा फिर से गठबंधन कर उससे निपटने की रणनीति तैयार कर रही हैं। उधर, राष्ट्रीय लोक दल ने भी गठबंधन का हिस्सा बनने की ओर संकेत दिए हैं। माना यह भी जा रहा है कि इसके सहारे छोटे चौधरी अपने बेटे को लोकसभा में भेजने का सपना देख रहे हैं।
गोरखपुर और फूलपुर में गठबंधन से हारी भाजपा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के घर गोरखपुर और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की सीटों पर हुए उपचुनाव में सपा और बसपा का गठबंधन जीत गया। वहां गठबंधन के प्रत्याशी ने जीत हासिल की, जिसके बाद भाजपा आलकमान को सोचने पर मजबूर होने पड़ा। इयके बाद अगला नंबर कैराना और नूरपुर का है। कैराना लोकसभा सीट भाजपा सांसद हुकुम सिंह के निधन के बाद खाली हुई है जबकि बिजनौर की नूरपुर विधानसभा सीट के विधायक लोकेंद्र सिंह चौहान की मौत सड़क हादसे में हो गई थी।
भाजपा दे सकती है मृगांका सिंह को मौका
माना जा रहा है कि कैराना लोकसभा सीट से भाजपा की तरफ से हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह को मौका दिया जा सकता है। इससे उनको सहानुभूति वोट भी मिल सकते हैं अौर उनकी सीट बच सकती है। हालांकि, मृगांका सिंह को पिछले विधानसभा चुनाव में भी टिकट मिला था लेकिन सपा के नाहिद हसन से उन्हें शिकस्त खानी पड़ी थी। इतना ही उस चुनाव में हुकुम सिंह के भतीजे अनिल चौहान को राष्ट्रीय लोकदल से टिकट मिला था। ऐसे में इसी सीट पर लड़ाई भाई व बहन की भी थी। इस सीट से हुकुम सिंह सात बार विधायक रह चुके थे, लेकिन उनकी बेटी को हार का सामना करना पड़ा था।
अजित या जयंत की चर्चा
उधर, कैराना क्षेत्र में चर्चा है कि इस सीट से जयंत चौधरी गठबंधन की तरफ से अपनी दावेदारी पेश कर सकते हैं। चूंकि यहां रालोद का दबदबा माना जाता है इसलिए इसे कोई नकार भी नहीं सकता। हो सकता है कि कैराना में उपचुनाव की घोषणा इसी महीने हो जाए। रालाेद सुप्रीमो अजित सिंह शामली में दो दिवसीय डेरा भी जमा चुके हैं। उन्होंने यहां कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर सद्भावना रैली भी निकाली थी। इससे इन चर्चाओं को बल मिल रहा है।
Updated on:
19 Mar 2018 01:07 pm
Published on:
19 Mar 2018 12:59 pm
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