3 नवंबर 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

जानिए, कब से शुरू होगा हिंदू नववर्ष 2018 और क्‍यों मनाया जाता है

18 मार्च से नवरात्र भी प्रारंभ हो जाएंगे जो 26 मार्च तक चलेंगे
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

नोएडा

•

image

sharad asthana

•

Updated: 20 Feb 2018, 11:08 AM IST

Hindi Nav Varsh

नोएडा। होली के बाद पूरे देश में हिंदू नववर्ष के स्‍वागत की तैयारियां श्‍ुारू हो जाएंगी। उसी दिन से चैत्र नवरात्र भी शुरू हो जाएंगे। सनातन धर्म की मान्यता अनुसार 18 मार्च 2018 से हिंदू नववर्ष विक्रम संवत् 2075 प्रारंभ होगा। इसके साथ ही 18 मार्च से चैत्र नवरात्र भी प्रारंभ हो जाएंगे जो 26 मार्च तक चलेंगे। ज्‍योतिष शिवा गौड़ के अनुसार, इस नवीन संवत्सर का नाम विरोधकृत होगा, जो रुद्रविंशतिका का 5वां संवत्सर है। इसके स्वामी चन्द्र हैं।

होली के टोटके- इनको आजमाने से बदल जाएगी आपकी किस्‍मत

27 जुलाई को है चंद्र ग्रहण

उनके अनुसार, विक्रम संवत् 2075 के अंतर्गत विरोधकृत संवत्सर में तीन सूर्यग्रहण एवं दो चंद्रग्रहण होंगें। हलांकि, तीनों सूर्यग्रहण भारत में नहीं दिखेंगे। शेष दो चंद्रग्रहण में से केवल एक भारत में दिखेगा, जो 27 जुलाई 2018 को होगा। यह खग्रास चंद्रग्रहण संपूर्ण भारत में दिखेगा।

संस्‍कृति मंत्रालय के कला डायरेक्टर ने राम मंदिर निर्माण को लेकर दिया बड़ा बयान

क्‍यों कहा जाता है विक्रम संवत्

वहीं, मेरठ के बिलेश्वर नाथ मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित हरीश जोशी ने बताया कि भारतीय पंचांग और काल निर्धारण का आधार विक्रम संवत् है। इसकी शुरुआत मध्य प्रदेश की उज्जैन नगरी से हुई थी। यह कैलेंडर राजा विक्रमादित्य के शासन काल में जारी हुआ था, इसलिए इसे विक्रम संवत् के नाम से जाना जाता हैं। इसके हिसाब से ही हर साल नवरात्र के पहले दिन से ही हिंदू नव वर्ष की शुरुआत होती है।

Holi 2018: इस समय करेंगे होलिका दहन तो चमकेगी किस्‍मत

विक्रमादित्य जारी किया था भारतीय कैलेंडर

बताया जाता है कि राजा विक्रमादित्य ने जीत के बाद जब राज्यारोहण किया तब उन्होंने प्रजा के सभी तरह के कर्जों को माफ करने का ऐलान किया। इसके साथ ही उन्‍होंने नए भारतीय कैलेंडर को जारी किया, जिसे विक्रम संवत् नाम दिया गया। इसे ईसा पूर्व 57 में जारी किया गया। उन्‍होंने बताया कि आज तक विक्रम संवत् भारतीय पंचाग और काल निर्धारण का आधार बना हुआ हैं। हिंदू नव वर्ष के साथ ही नवरात्र भी प्रारंभ हो जाते हैं। साथ ही बसंत ऋतु के आगमन का संकेत मिलने लगता है। ब्रह्मा पुराण के अनुसार, सृष्टि का प्रारंभ इसी दिन हुआ था। ब्रह्माजी द्वारा सृष्टि की रचना प्रारंभ करने के दिन से ही नव वर्ष का आरम्भ होना माना जाता है। सतयुग का प्रारंभ भी इसी दिन से माना जाता है।

होलाष्टक: इन आठ दिनों में न करें कोई काम , आएगी विघ्न बाधा, होगा बड़ा नुकसान