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अक्षय कुमार पैडमैन तो उत्‍तर प्रदेश के इस जिले में रहती हैं पैडवूमेन

बॉलीवुड के खिलाड़ी अक्षय कुमार और अभिनेत्री राधिका आप्‍टे की फिल्‍म पैडमैन शुक्रवार को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई
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नोएडा

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sharad asthana

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Updated: 9 Feb 2018, 1:32 PM IST

padman

नोएडा। बॉलीवुड के खिलाड़ी अक्षय कुमार और अभिनेत्री राधिका आप्‍टे की फिल्‍म पैडमैन शुक्रवार को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई। अक्षय कुमार की पैडमैन की कहानी एक शख्‍स के जीवन से प्रेरित है, जो तमिलनाडु के रहने वाले अरुणाचलम मुरुगनाथम हैं। उन्‍होंने महिलाओं को सस्ते सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने के लिए काफी मेहनत की थी। अक्षय कुमार मूवी में अरुणाचलम की भूमिका निभा रहे हैं। आपको यह जानकर आश्‍चर्य होगा कि अरुणाचलम का कनेक्‍शन उत्‍तर प्रदेश के मेरठ से भी जुड़ा हुआ है।

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महिलाओं को दी गई ट्रेनिंग

दरअसल, मेरठ में भी मुरुगनाथम की मशीन से महिलाओं का एक ग्रुप स्वच्छता और स्वरोजगार का संदेश दे रहा है। इनका ग्रुप पैडवूमेन के नाम से प्रसिद्ध है। मुरुगनाथम ने न केवल स्‍वच्‍छता का संदेश दिया है बल्कि कई महिलाओं के लिए रोजगार ? के दरवाजे भी खोले हैं। उनकी कंपनी के प्रतिनिधियों ने महिलाओं को इसके लिए बाकायदा ट्रेनिंग तक दी है।

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मुरुगनाथम की कंपनी से मंगाई गई है मशीन

मेरठ के रजपुरा ब्लाॅक में पैडवूमेन मतलब महिलाओं का यह ग्रुप जिला पंचायत उद्योग के माध्यम से सैनिटरी पैड बनाता है। सैनि‍टरी पैड बनाने में जिस मशीन का इस्‍तेमाल किया जा रहा है, व‍ह अरुणाचलम मुरुगनाथम की कंपनी से मंगाई गई है। फिलहाल अभी ऐसी महिलाओं की संख्‍या कम है लेकिन अब इनकी बढ़ने की संभानाएं हैं। इस काम के लिए इन महिलाओं को बाकायदा लखनऊ में ट्रेनिंग भी दी गई है। सैनिटरी पैड बनाने के लिए जिला पंचायत उद्योग केंद्र की आेर से इन महिलाओं काे भेजा गया था। लखनऊ में असली 'पैडमैन' की कंपनी के प्रतिनिधियों की टीम ने इनको पैड बनाने का प्रशिक्षण दिया है।

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यहां होता है सप्‍लाई

अब इसकी मांग भी बढ़ने लगी है, जिसे देखते हुए पंचायती राज विभाग ने इसके विस्‍तार की योजना तैयार की है। अभी तो यहां से बने सैनिटरी पैड को महिला जेल, जिला अस्पताल, आंगनबाड़ी केंद्र, महिला कल्याण विभाग आदि को सप्लाई किया जा रहा है। ग्रुप में शामिल महिलाओं ने बताया कि उनकी सोच अब काफी बदल चुकी है। वे अब पैड बनाकर परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने में भी मदद कर रही हैं। वहीं, सीडीओ आर्यका अखौरी का कहना है कि सैनिटरी पैड बनाने की इकाई ब्लाॅक स्तर तक ले जाने की योजना है। इसके जरिए महिलाओं को स्वच्छता व स्वरोजगार का संदेश भी दिया जा रहा है।