
नई दिल्ली।भारतीय हॉकी को एक नए मुकाम तक पहुंचाने वाले कोच हरेंद्र सिंह बिहार के छपरा जिला के रहने वाले हैं । भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीम को बुलंदियों पर पहुंचाने वाले हरेंद् वैसे तो बहुत शांत स्वभाव के हैं।लेकिन भारतीय टीम इनके नेतृत्व में हमेशा आक्रमक हॉकी खेल कर नए इतिहास गढ़ते आ रही है । भारतीय पुरुष हॉकी टीम 18 वें एशियाई खेलों में फाइनल तो नहीं खेल सकी लेकिन पाकिस्तान 2 के मुकाबले 1 गोल से मिली जीत फाइनल जीतने से कम भी नहीं है ।
बिहार के छपरा के हैं हरेंद्र
बिहार के छपरा जिला के निवासी हरेंद्र सिंह के बारे में यहां यह बताना जरूरी हो जाता है कि हरेंद्र 2009 से 2011 तक पहले भी भारतीय पुरुष टीम के कोच रह चुके हैं।द्रोणाचार्य पुरुस्कार विजेता हरेंद्र ने भारतीय हॉकी को बहुत कुछ दिया है ।हरेंद्र के मार्गदर्शन में भारतीय जूनियर पुरुष टीम ने 2016 में वर्ल्ड कप जीता था और महिला टीम गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में चौथे स्थान पर रही। इसके अलावा महिला टीम ने पिछले साल जापान में नौवां महिला एशिया कप खिताब भी जीती थी।
अपने जुनून और जज्बे के लिए मशहूर
अपने 17 साल के कोचिंग करियर में हरेंद्र ने कई मुश्किलों का सामना किया है । अपने जुनून और जज्बे के लिए मशहूर हरेंद्र ने भारतीय हॉकी को उसके स्वर्णिम दिनों में वापस से ला दिया है । भारतीय टीम दिन बा दिन और बेहतर होती जा रही है । उनका किरदार हिंदी फिल्म ''चक दे इंडिया' के कबीर खान की याद दिलाता है । जिसने एक युवा टीम की कमान संभाली और फिर उसे विश्व विजेता बना दिया ।
Published on:
2 Sep 2018, 9:54 AM IST
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