
Pali Nagar Nigam Mayor Chunav (Photo-Patrika)
Pali Nagar Nigam Mayor Chunav 2026 : पाली। नगर निकाय चुनाव में कांग्रेस ने सबसे ज्यादा 29 वार्ड जीतकर अपना दम दिखाया था। भाजपा 21 वार्ड पर सिमट गई और 15 निर्दलीय पार्षदों ने मानो अपनी कीमत बढ़ा ली। लेकिन महापौर चुनाव आया तो पूरा गणित ही उलट गया। जो दल संख्या बल में आगे था, उसकी प्रत्याशी दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू सकी और जो पीछे था, उसने वोटों की ऐसी जुगत भिड़ाई कि 21 के मुकाबले 33 वोट लेकर महापौर की कुर्सी अपने नाम कर ली। भाजपा की नमिता बुबकिया ने जीत दर्ज कर ली।
निकाय चुनाव में भाजपा ने 64 और कांग्रेस ने 59 वार्डों में चुनाव लड़ा था। कांग्रेस ने बिखराव को समेटते हुए 29 वार्ड जीते, जबकि भाजपा 21 पर रही। 15 निर्दलीयों की जीत ने पहले ही बता दिया था कि असली खेल इन 15 के हाथ में है। महापौर चुनाव में यही निर्दलीय 'किंगमेकर' बनकर सामने आए।
कांग्रेस ने सुमित्रा जैन को अधिकृत प्रत्याशी बनाया, लेकिन कांग्रेस से जीतीं राजबाला हिंगड़ ने निर्दलीय मैदान में उतरकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया। कांग्रेस के पार्षदों की बाड़ाबंदी हुई तो चर्चाओं का बाजार भी गर्म रहा। कभी खबर आई कि इधर वाले उधर चले गए, कभी उधर वालों के इधर आने की चर्चा हुई।
आखिर मतदान के दिन तस्वीर साफ हुई। निर्दलीय प्रत्याशी राजबाला के साथ 27 पार्षद मतदान केंद्र पहुंचे। मतदान के बाद भी यह कुनबा राजबाला के घर पहुंचा। नतीजा आया तो राजबाला के खाते में 29 वोट थे। यानी कांग्रेस और निर्दलीयों का ऐसा मेल हुआ कि अधिकृत प्रत्याशी के सामने ही बागी प्रत्याशी भारी पड़ गई।
उधर, कांग्रेस की अधिकृत प्रत्याशी सुमित्रा जैन के पक्ष में मतदान केंद्र पर महज 8 पार्षद पहुंचे। सुमित्रा उनके सामने आईं तो लगा कि कम से कम ये आठ वोट तो पक्के हैं, लेकिन मतपेटी खुली तो कहानी कुछ और ही निकली। सुमित्रा को सिर्फ 3 वोट मिले। यानी जिन आठ के सामने प्रत्याशी खुद आईं, उनमें से भी सभी वोट उनके खाते में नहीं पहुंचे। कांग्रेस के लिए यह महापौर चुनाव का सबसे बड़ा झटका रहा।
भाजपा के 21 निर्वाचित पार्षद बाड़ाबंदी से सीधे नगर निगम पहुंचे। उनके साथ एक निर्दलीय पार्षद भी था। यानी कुल 22 पार्षद, लेकिन नतीजा आया तो भाजपा के खाते में 33 वोट निकले। मतलब साफ था, भाजपा ने अपने 21 पार्षदों के अलावा 12 और पार्षदों का समर्थन जुटा लिया। 15 निर्दलीयों के बीच चली सियासी गणित में भाजपा ने बागी पार्षदों और निर्दलीयों को अपने पाले में खींचकर वह आंकड़ा जुटा लिया, जिसकी जरूरत थी। इस तरह पाली नगर निकाय में पहली बार भाजपा का महापौर बनने का रास्ता साफ हुआ।
भाजपा के 21 पार्षद संख्या में भले ही कांग्रेस से कम थे, लेकिन चुनावी रणनीति में पार्टी ने कसर नहीं छोड़ी। पूर्व विधायक ज्ञानचंद पारख ने मोर्चा संभाला। पार्टी से बगावत कर चुनाव जीते चार पार्षदों को साथ लाने के साथ आठ निर्दलीयों को भी साधने की कवायद की।
इस पूरे खेल में भाजपा जिलाध्यक्ष सुनील भंडारी का मैनेजमेंट भी चर्चा में रहा। मतदान के तुरंत बाद पार्षदों को एकजुट कर बाड़ाबंदी में ले जाया गया। मतगणना तक उनकी लोकेशन को लेकर भी खूब कयास लगते रहे, लेकिन पार्षदों का कुनबा बिखरा नहीं।
Updated on:
22 Sept 2026 11:44 am
Published on:
22 Sept 2026 11:43 am
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