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BJP के कब्जे वाली सूरत में इस बार कड़ा मुकाबला, बागी बने मुसीबत

करंज व लिंबायत सीट समेत ग्रामीण इलाकों की चार सीटों में से मांडवी और महुआ में भी कड़े संघर्ष की स्थिति बनी हुई है।
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ashutosh tiwari

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Updated: 8 Dec 2017, 10:26 AM IST

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अनंत मिश्रा
पिछले चुनाव में सूरत की सभी 12 सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमाया। इस बार आरक्षण की मांग को लेकर पाटीदार तो जीएसटी में आ रही परेशानियों से व्यापारी वर्ग लंबे समय तक आंदोलित रहा। इसी ने वस्त्र नगरी के नाम से विख्यात सूरत को गुजरात ही नहीं, पूरे देश के केंद्र में ला दिया। पिछले चुनाव में पाटीदारों के साथ व्यापारी भी भाजपा के साथ थे। इस बार तस्वीर कुछ बदली-बदली सी नजर आ रही है। इसीलिए पीएम नरेंद्र मोदी ने प्रचार के आखिरी दिन यहां रैली कर मतदाताओं को संदेश देने की कोशिश की। शहर के राजनीतिक मिजाज की चर्चा की जाए तो कामरेज, वराछा रोड व सूरत उत्तर की सीटों पर कांग्रेस कड़े मुकाबले में भाजपा से आगे दिखाई दे रही है। तीनों सीटों पर पाटीदार मतदाताओं की बहुलता है। करंज व लिंबायत सीट समेत ग्रामीण इलाकों की चार सीटों में से मांडवी और महुआ में भी कड़े संघर्ष की स्थिति बनी हुई है।

३ सीटों पर बागी से कमल परेशान
दो नों दलों में टिकट वितरण को लेकर उपजी नाराजगी कई जगह देखने में आई। अनुशासित कही जाने वाली भाजपा का अनुशासन ३ सीटों पर तार-तार हो गया। चौर्यासी सीट पर अजय चौधरी, करंज सीट पर भीमजी पटेल तो मांडवी सीट पर कुंवरजी हलपति भाजपा की राह में मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं। सूरत पूर्व से अल्पसंख्यक को टिकट न देने का खामियाजा कांग्रेस को भी उठाना पड़ रहा है। सूरत पश्चिम पर अल्पसंख्यक प्रत्याशी को टिकट दिया, लेकिन उससे बात बनी नहीं। लिंबायत सीट पर एनसीपी का अल्पसंख्यक प्रत्याशी कांग्रेस की मुश्किल बढ़ा रहा है।

आंखों का तारा बने व्यापारी
कपड़ा कारोबार से यहां ६-७ लाख व्यापारी सीधे जुड़े है। इसलिए दोनों दलों की नजरें उन पर है। भाजपा की तरफ से अरुण जेटली समेत तमाम बड़े नेता व्यापारियों की मान-मनुहार में लंबे समय तक जुटे रहे। व्यापारियों को अपने पाले में लाने में कांग्रेस ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तथा आनंद शर्मा ने व्यापारियों की सुनी और भरोसा दिलाया कि उनकी जीत में ही व्यापारियों के हित सुरक्षित रहेंगे।