अनंत मिश्रा
पिछले चुनाव में सूरत की सभी 12 सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमाया। इस बार आरक्षण की मांग को लेकर पाटीदार तो जीएसटी में आ रही परेशानियों से व्यापारी वर्ग लंबे समय तक आंदोलित रहा। इसी ने वस्त्र नगरी के नाम से विख्यात सूरत को गुजरात ही नहीं, पूरे देश के केंद्र में ला दिया। पिछले चुनाव में पाटीदारों के साथ व्यापारी भी भाजपा के साथ थे। इस बार तस्वीर कुछ बदली-बदली सी नजर आ रही है। इसीलिए पीएम नरेंद्र मोदी ने प्रचार के आखिरी दिन यहां रैली कर मतदाताओं को संदेश देने की कोशिश की। शहर के राजनीतिक मिजाज की चर्चा की जाए तो कामरेज, वराछा रोड व सूरत उत्तर की सीटों पर कांग्रेस कड़े मुकाबले में भाजपा से आगे दिखाई दे रही है। तीनों सीटों पर पाटीदार मतदाताओं की बहुलता है। करंज व लिंबायत सीट समेत ग्रामीण इलाकों की चार सीटों में से मांडवी और महुआ में भी कड़े संघर्ष की स्थिति बनी हुई है।