
छत्तीसगढ़ के मेडिकल कॉलेजों में 23 सीटें हो गईं लैप्स, स्टूडेंट्स इन विषयों में दिखा रहे रुचि...
रायपुर। Medical College Admission : एनाटॉमी, फिजियोलॉजी, बायो कैमिस्ट्री जैसे मेडिकल के बेसिक विषयों की पीजी सीटें इस बार फिर खाली रह गईं। माइक्रोबायोलॉजी, पीएसएम, फॉर्माकोलॉजी व फोंरेसिंक मेडिसिन जैसे विषयों में भी छात्रों ने रूचि नहीं दिखाई। सरकारी व निजी कॉलेजों में एडमिशन की आखिरी तारीख तक 23 सीटों पर प्रवेश नहीं हुआ। इस कारण ये सीटें लैप्स हो गईं। लैप्स होने वाली सभी सीटें नॉन क्लीनिकल विभाग की हैं जिसमें प्राइवेट प्रैक्टिस का कोई स्कोप नहीं होता। इसलिए छात्र प्रवेश लेना नहीं चाहते। पिछले साल भी पीजी की 60 सीटें लैप्स हो गई थीं।
हालांकि इस साल इसमें काफी कमी आई है। इसकी प्रमुख वजह जीरो परसेंटाइल से एडमिशन है। मेडिकल कॉलेजों में संचालित पीजी कोर्स में एडमिशन की आखिरी तारीख 30 नवंबर थी। 30 खाली सीटों को भरने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने विशेष स्ट्रे राउंड भी चलाया। इसके बावजूद स्टेट व ऑल इंडिया कोटे की सीटें लैप्स हो गईं। चार राउंड की काउंसिलिंग के बाद स्पेशल राउंड के लिए सरकारी व निजी में 30 सीटें खाली थीं। इनमें रायपुर में सात सीटों पर प्रवेश नहीं हुआ था।
ऑल इंडिया की चार में 3 सीटों पर प्रवेश हो गया, लेकिन बायो कैमेस्ट्री की एक सीट खाली रह गई। जो सीटें भरीं उनमें पैथोलॉजी की दो व पीएसएम की एक सीट शामिल हैं। स्टेट कोटे की तीन सीटें फोरेंसिक मेडिसिन, माइक्रो बायोलॉजी व पीएसएम की सीट खाली थी। ये सभी ईडब्ल्यूएस कोटे की थी। इनमें प्रवेश के लिए कोई छात्र नहीं मिला। प्रदेश में पीजी की कुल 520 सीटें हैं, जिनमें 120 के आसपास निजी कॉलेजों की हैं।
निजी में 30 लाख और सरकारी कॉलेज में महज 60 हजार फीस : प्रदेश के एक निजी मेडिकल कॉलेज में पीजी की 7 से 10 लाख रुपए सालाना है। फीस विनियामक कमेटी ने पिछले साल ही नॉन क्लीनिकल के लिए 7 व क्लीनिकल विषयों के लिए 10 लाख फीस तय की थी। पीजी तीन साल का कोर्स है। इसके हिसाब से पूरे कोर्स की ट्यूशन फीस 21 से 30 लाख रुपए है। निजी कॉलेज होस्टल व मेस के लिए अन्य मद में मोटी फीस ले रहे हैं। दूसरी ओर सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सालाना फीस 20 हजार है। इस तरह तीन साल की फीस महज 60 हजार रुपए है। इसमें होस्टल व मेस फीस सामान्य है। हाल ही में हाईकोर्ट ने भिलाई के एक निजी कॉलेज में पीजी की फीस बढ़ाने से मना कर दिया था।
पिछले साल कैंसर जैसी सीट खाली रह गई थी : नेहरू मेडिकल कॉलेज में पिछले साल पीएसएम की 3 समेत 13 सीटें लैप्स हो गईं थीं। एनाटॉमी, फिजियोलॉजी, बायो केमेस्ट्री व पैथोलॉजी की सीटें नहीं भर पाईं। यही नहीं कैंसर जैसे महत्वपूर्ण विषय की एक सीट पर आल इंडिया कोटे से कोई एडमिशन नहीं लिया था। ईएनटी की एक सीट भी नहीं भरी थी। वहीं बिलासपुर में फोरेंसिक मेडिसिन व नॉन क्लीनिक की सीटें नहीं भर पाईं। यही स्थिति अंबिकापुर, राजनांदगांव व जगदलपुर में रही। निजी कॉलेजों में अमूमन यही स्थिति रही थी।
6 साल में नॉन क्लीनिकल की सीटें इस तरह खाली
वर्ष कुल सीटें खाली
2023 520 23
2022 393 60
2021 302 55
2020 202 45
2019 170 25
2018 170 26
प्रैक्टिस वाले विषयों में प्रवेश
डॉक्टरों की टीचिंग में रुचि पहले की तुलना में कम हो रही है, प्रैक्टिस पर ध्यान ज्यादा है। हालांकि सुपर स्पेश्यलिटी डिग्री वाले न्यूरो सर्जन डॉ. राजीव साहू व प्लास्टिक सर्जन डॉ. कमलेश अग्रवाल के अनुसार टीचिंग में रुचि कम हुई हो, ऐसी बात नहीं है। हां, डॉक्टर ये ध्यान जरूर रखते हैं कि दूसरों की तुलना में वे कितने अच्छे डॉक्टर साबित हो सकते हैं। अब स्पेश्यलिटी नहीं, सुपर स्पेश्यालिटी का जमाना है। यही कारण है कि अब ज्यादातर डॉक्टर एमडी या एमएस के बाद डीएम या एमसीएच की पढ़ाई पर फोकस कर रहे हैं।
जीरो परसेंटाइल से प्रवेश की वजह से इस बार पिछले सालों की तुलना में कम सीटें लैप्स हुई हैं। नॉन क्लीनिकल विभागों में कम रैंक वाले छात्रों का एडमिशन हुआ है। हालांकि इसमें शून्य नंबर वाले कोई नहीं है।
- डॉ. विष्णु दत्त, डीएमई छत्तीसगढ़
Published on:
02 Dec 2023 10:23 am
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