इनकी मदद से पुलिसकर्मियों, उच्च शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों और छात्रों, एनएसएस-एनसीसी स्वयंसेवकों, अस्पताल स्टॉफ, गाड्र्स आदि को ह्दयघात की स्थिति में सीपीआर प्रदान करने का प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। परियोजना की समन्वयक एम्स रायपुर के फिजियोलॉजी विभाग की अतिरिक्त प्राध्यापक डॉ. जयश्री घाटे ने बताया कि ह्दयघात की स्थिति में प्रारंभिक समय स्वर्णिम होता है। यदि इस समय रोगी को सीपीआर प्रदान कर दिया जाए तो उसकी जान बचाई जा सकती है। देश में 98 प्रतिशत हृद्यघात के प्रकरण में समय पर सीपीआर प्रदान न करने से रोगी की मृत्यु होती है।