3 अक्टूबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Patrika Exclusive: कोकून से धागा बनाएंगी छत्तीसगढ़ के 11 जिलों की महिला समूह, बुना जाएगा नया सिल्क ब्रांड

Patrika Exclusive News: छत्तीसगढ़ के 11 जिलों की महिला समूह कोकून से सिल्क धागा तैयार करेंगी। इससे महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर मिलेंगे, साथ ही नया सिल्क ब्रांड तैयार होगा।
2 min read
Google source verification
Patrika Exclusive

कोकून से धागा बनाएंगी छत्तीसगढ़ के 11 जिलों की महिला समूह (Photo Patrika Create)

Patrika Exclusive: @ राहुल जैन। महात्मा गांधी की जयंती पर छत्तीसगढ़ ने अहिंसा के संदेश को रोजगार और पारंपरिक रेशम उत्पादन से जोड़ते हुए एक नई पहल शुरू की है। प्रदेश में अब ऐसा रेशम तैयार किया जा रहा है, जिसके लिए किसी कीट को मारने की जरूरत नहीं पड़ती। इसी अहिंसा आधारित रेशम से तैयार साड़ी को 'सीजी अमारी' ब्रांड के नाम से बाजार में लाया जाएगा। इसकी खासियत यह होगी कि रेशम के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले तसर कोकून से तितली पहले ही प्राकृतिक रूप से बाहर निकल चुकी होगी। इसके बाद बचे कोकून से रेशम का घागा तैयार किया जायेगा।

शिक्षा मंत्री ने किया शुभारंभ

राजधानी के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में शुक्रवार को ग्रामोद्योग एवं स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने 'अमारी सिल्क' ब्रांड का शुभारंभ किया। ग्रामोद्योग विभाग की पहल पर रायगढ़, जशपुर,सरगुजा, बिलासपुर, मुंगेली, कांकेर, जांजगीर-चांपा, बीजापुर, सूरजपुर और बस्तर के 11 महिला समूह अमारी रेशम धागा तैयार करने से जुड़े हैं। छत्तीसगढ़ के लिए यह पहल स्थानीय तसर, महिला समूहों और पारंपरिक रेशम अर्थव्यवस्था को नए बाजार से जोड़ने की संभावना भी रखती है।

यह है 'सीजी अमारी सिल्क' की विशेषता

यह पूरी तरह अहिंसक और पर्यावरण के अनुकूल प्रक्रिया से बनता है।
इसकी बनी साड़ियां पहनने में बेहद आरामदायक, मुलायम और हल्की होती हैं।

कठिन है प्रक्रिया.

रेशम के रेशे अंकुरण के दौरान टूट जाते हैं, इसलिए अहिंसा रेशम के लिए अधिक कौशल और धैर्य की आवश्यकता होती है। इसके रेशे छोटे होते हैं और इन्हें सावधानीपूर्वक कातना और बुनना पड़ता है, जिससे यह प्रक्रिया धीमी और अधिक मेहनत लेती है। इसके लिए इस पर 11 महिला स्व-सहायता समूह काम कर रही है।

इस वजह से अहिंसा रेशम

सामान्य व्यावसायिक रेशम उत्पादन में कोकून के भीतर मौजूद प्यूपा को स्टिफलिंग प्रक्रिया के जरिए मार दिया जाता है, ताकि कोकून को नुकसान न पहुंचे और उससे लगातार रेशम का धागा निकाला जा सके। इस प्रक्रिया में जीवित कीट के मारे जाने के कारण कुछ वर्ग और समुदाय रेशम से बने वस्त्रों का उपयोग नहीं करते। इसके विपरीत अमारी रेशम में ऐसे तसर कोकून लिए जाते हैं, जो प्राकृतिक रूप से पोले हो चुके हों। इनमें किसी तरह की स्टिफलिंग या कीट को मारने की प्रक्रिया शामिल नहीं होती। तितली स्वयं कोकून से बाहर निकल जाती है और उसके बाद उस कोकून का इस्तेमाल रेशम का धागा बनाने में किया जाता है। इसी वजह से इसे पूर्णतः अहिंसक रेशम माना गया है।

सचिव ग्रामोद्योग विभाग ने कहा

ग्रामोद्योग विभाग के सचिव राजेश राणा ने कहा स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने लिए विभाग लगातार काम कर रहा है। बस्तर संभाग के पुनर्वासित एवं आदिवासी युवक-युवतियों के लिए कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती पर 'अमारी सिल्क' ब्रांड का शुभारंभ किया है। इसमें किसी भी जीव की हिंसा के बिना रेशम निकालकर साड़ी तैयार की जाएगी। इस वजह से इसे अहिंसा रेशम साड़ी भी कहा जाता है।