सूत्रों के मुताबिक आरोपी वरिष्ठ अधिकारियों के नाक के नीच नकली रॉयल्टी पर्ची छाप कर शासन को चपत लगा रहा था। अहम बात यह है मामला खुलने के बाद भी विभाग ने अन्य कंपनियों के द्वारा जमा की गई रॉयल्टी पर्चियों जांच अब तक नहीं की है। जबकि शिकायत में 12 बड़ी कंपनियों के क्लीयरेंस की जांच करने की मांग की गई थी।