
‘मेरी विदाई ऐसे मत करना…’ (फोटो सोर्स- पत्रिका)
Ganesh Visarjan: गणेशोत्सव के दस दिनों तक शहर में भक्ति और उत्साह का माहौल रहने के बाद अब विसर्जन की बेला आ गई है। विसर्जन को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के वीडियो सामने आते रहते हैं, जिनमें कुछ दृश्यों को लेकर लोग सवाल भी उठाते हैं। इसी बीच एआई के जरिए भगवान गणेश की ओर से रायपुरवासियों के नाम एक भावुक पाती सामने आई है। इसमें गणेश प्रतिमा विसर्जन को लेकर पर्यावरण संरक्षण, ध्वनि प्रदूषण, ट्रैफिक व्यवस्था और सुरक्षा का संदेश दिया गया है।
पाती में कहा गया है कि गणेश प्रतिमा की विदाई सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि पंचतत्व से बने स्वरूप का पंचतत्व में विलीन होना है। इसलिए विसर्जन ऐसा हो, जिससे प्रकृति, समाज और किसी व्यक्ति को नुकसान न पहुंचे।
पाती में भगवान गणेश की ओर से कहा गया है कि भाद्रपद के इन दस दिनों में बूढ़ापारा से तेलीबांधा और गुढ़ियारी से पंडरी तक भक्तों ने जिस श्रद्धा और उत्साह के साथ गणेशोत्सव मनाया, वह उनकी आस्था का प्रमाण है। अब विसर्जन के समय इसी आस्था को प्रकृति और समाज के प्रति जिम्मेदारी में बदलने की जरूरत है।
एआई से तैयार संदेश में खारुन नदी के साथ बूढ़ातालाब और कंकाली तालाब जैसे जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाने की अपील की गई है। इसमें कहा गया है कि प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) और रासायनिक रंगों से बनी प्रतिमाओं के जलस्रोतों में विसर्जन से जल और जलीय जीव प्रभावित हो सकते हैं।
ऐसे में नगर निगम द्वारा बनाए गए कृत्रिम विसर्जन कुंडों का इस्तेमाल करने की अपील की गई है। संदेश में मिट्टी से बनी प्रतिमा के मिट्टी और जल में विलीन होने को प्रकृति के अनुकूल विदाई बताया गया है।
पाती में ध्वनि प्रदूषण को लेकर भी संदेश दिया गया है। इसमें कहा गया है कि भक्ति में भाव होना चाहिए, अनावश्यक शोर नहीं। तेज आवाज वाले डीजे और बेस साउंड सिस्टम से बच्चों, बुजुर्गों और अस्पतालों में इलाज करा रहे मरीजों को परेशानी हो सकती है। इसलिए पारंपरिक ढोल-ताशे, झांझ-मंजीरे और ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारों के साथ उत्सव मनाने की अपील की गई है।
विसर्जन के दौरान शहर की सड़कों पर लगने वाले जाम को लेकर भी भगवान गणेश की ओर से रायपुरवासियों से अनुशासन बनाए रखने की अपील की गई है। संदेश में जयस्तंभ चौक, मालवीय रोड, शारदा चौक और आश्रम तिराहा जैसे प्रमुख इलाकों में यातायात प्रभावित होने की स्थिति का जिक्र किया गया है।पाती में कहा गया है कि विसर्जन जुलूस की वजह से किसी मरीज या एंबुलेंस के लिए रास्ता बाधित नहीं होना चाहिए। गणेश समितियों से निर्धारित समयसीमा में झांकी और चल समारोह पूरा करने तथा पुलिस और यातायात व्यवस्था में सहयोग करने की अपील की गई है।
महादेव घाट सहित विसर्जन स्थलों पर सुरक्षा को लेकर भी संदेश दिया गया है। इसमें युवाओं से गहरे पानी में उतरने से बचने, सुरक्षा घेरे और एसडीआरएफ के दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है। साथ ही विसर्जन के दौरान नशाखोरी और अमर्यादित आचरण से बचने का संदेश दिया गया है। पाती में कहा गया है कि उत्सव के दौरान चेतना और संयम ही असली शक्ति है।
पाती के अंत में भगवान गणेश की ओर से कहा गया है कि विसर्जन का वास्तविक अर्थ उनके सद्गुणों- बुद्धि, धैर्य, विवेक और पर्यावरण के प्रति सम्मान को अपने जीवन में उतारना है। केवल प्रतिमा का विसर्जन हो, लेकिन उनकी सीख और मूल्यों का नहीं।
शहर को स्वच्छ, सुरक्षित और शांत रखकर दी गई विदाई को ही सच्ची विदाई बताया गया है। पाती का संदेश है कि ‘अगले बरस फिर आऊंगा, बस इस बार रायपुर को बचा लेना…’।
Updated on:
24 Sept 2026 07:48 pm
Published on:
24 Sept 2026 07:48 pm
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