
उपभोक्ताओं के साथ-साथ सरकार को भी चूना लगा रही थी गैस कंपनी, बिना बिल के सिलेंडर करते थे सप्लाई
रायपुर. गो-गैस पर नाप-तौल विभाग ने कार्रवाई तो कर दी है, लेकिन कंपनी के द्वारा उपभोकताओं से बीते एक साल से धोखाधड़ी की जा रही थी। व्यावसायिक सिलेंडर की सप्लाई करने का दावा करने वाली कंपनी ने प्रति सिलेंडर तीन से चार किलो की गैस कम भर कर उपभोक्ताओं तक पहुंचाया है।
चौंकाने वाली बात तो यह है कि कंपनी द्वारा बिना बिल के ही अधिकांश जगहों पर सिलेंडर की सप्लाई की जाती थी। जबकि, व्यावसायिक सिलेंडर के माध्यम से जीएसटी का भुगतान भी किया जाना अनिवार्य है। अहम बात तो यह है कि कंपनी ने अधिकांश उपभोक्ताओं के गैस कार्ड भी नहीं बनाया है। इससे साफ है की कंपनी द्वारा वर्षों से बिना बिल के ही गैस की सप्लाई बड़े पैमाने में की जा रही थी।
पत्रिका ने जुटाए साक्ष्य
पत्रिका ने कुकुरबेड़ा, डीडीनगर और लाखे नगर जैसे इलाकों से कुछ व्यापारियों से गो गैस की सप्लाई के बारे में चर्चा की तो उन्होंने बताया व्यावसायिक गैस की सप्लाई का कोई बिल नहीं दिया जाता है। सप्लाई के लिए वाहन आकर सिलेंडर छोड़कर चला जाता है।
बीते साल भी हुई थी बड़ी कार्रवाई
2019 में भी खाद्य विभाग ने गो गैस के सिलतरा के फेस-2 के प्लांट में छापा मारा था। उस दौरान भी यह बात सामने आई थी कि कंपनी बिना किसी भंडारण लाइसेंस के एलपीजी स्टॉक कर रही थी और खरीदी-बिक्री भी कर रही थी। प्रशासन ने मौके पर एलपीजी से भरे दो टैंकर (एक में 17240 और दूसरे में 17200 किलोग्राम एलपीजी, 205 सिलेंडर, 10000 किलोग्राम एलपीजी रिफलिंग के लिए और तीन बुलेट टैंक जिसमें 57500 किलोग्राम एलपीजी को जब्त किया था। चौंकाने वाली बात यह है कि उक्त कंपनी बिना विस्फोटक लाइसेंस के काम कर रही थी, लेकिन छापा पडऩे के दो दिन बाद ही लाइसेंस जारी कर दिया गया था।
कंपनी के प्लांट को सील कर दिया गया है। बिल के संबंध में दूसरे विभाग कार्रवाई और जांच कर सकते हैं। हमने सिर्फ मापक यंत्र की सील तोडऩे का प्रकरण दर्ज किया है।
-बीआर सिदार, उप नियंत्रक, नाप-तौल विभाग
Updated on:
02 Nov 2020 11:08 pm
Published on:
02 Nov 2020 11:08 pm
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