
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के छात्र (photo Patrika)
IGKV Students: @गुंजन परमार। .रोजमर्रा के खाने में प्रोटीन की जरूरत पूरी करने के लिए अब दलहन और बीजों से नए खाद्य उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (आईजीकेवी) के बायोटेक्नोलॉजी विभाग के स्टूडेंट्स ने तिवरा दाने में पाए जाने वाले उन्नत प्रोटीन को टॉक्सिन मुक्त बनाया है। टॉक्सिन मुक्त प्रोटीन खाने से कोई नुकसान नहीं होगा। खास बात यह है कि तिवरा यानी लेथायरस की पैदावार अब पहले की तुलना में कम होती है, ऐसे में इसके पोषण गुणों को खाद्य उत्पादों के रूप में इस्तेमाल करने का यह एक तरीका हो सकता है।
विभागाध्यक्ष डॉ. जेनू झा से मिली जानकारी के अनुसार डॉ. शुभा बैनर्जी और डॉ. सतीश वेरुलकर के मार्गदर्शन में स्टूडेंट्स इस दिशा में काम कर रहे हैं। सोयाबीन, चना और मटर के प्रोटीन कंटेंट का अध्ययन किया। इसके बाद अलग-अलग संयोजन तैयार कर प्रोटीन बेस्ड बिस्किट और सूप बनाए गए। स्टूडेंट्स के अनुसार चना और मटर के संयोजन से तैयार सूप में 28% प्रोटीन मिला। इस मिक्सअप में आयरन की मात्रा 156 पीपीएम और जिंक 16 पीपीएम दर्ज की गई।
स्टूडेंट्स ने तिवरा, सोयाबीन, चना और मटर जैसे प्लांट बेस्ड प्रोटीन स्रोतों का अध्ययन किया। इनके प्रोटीन कंटेंट की तुलना करने के बाद अलग-अलग संयोजन तैयार किए गए। इसी आधार पर प्रोटीन वाले बिस्किट और सूप जैसे उत्पाद तैयार किए गए।
जिन विकल्पों का अध्ययन किया गया, उनमें तिवरा में प्रोटीन का स्तर सबसे अधिक मिला। तिवरा को लेथायरस के नाम से भी जाना जाता है। इसकी खेती कम होने के कारण इसके पोषण गुणों को नए खाद्य उत्पादों के जरिए इस्तेमाल करने पर जोर दिया जा रहा है। स्टूडेंट्स के अनुसार इसमें आयरन की मात्रा 156 पीपीएम और जिंक 16 पीपीएम दर्ज हुआ। इन आंकड़ों का सही अर्थ समझने के लिए इनके आधार मानक को भी स्पष्ट करना जरूरी है। पहले इन बीजों में मौजूद पोषक तत्वों की मात्रा की तुलना के लिए लैब रिपोर्ट या प्रकाशित पोषण आंकड़ों को आधार बनाया जा सकता है।
Updated on:
06 Oct 2026 03:01 pm
Published on:
06 Oct 2026 03:00 pm
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