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दोबारा होगी एमडी पीडियाट्रिक की परीक्षा, गड़बड़ी के बाद रद्द की थी हेल्थ विवि ने

Raipur News: पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में एमडी पीडियाट्रिक की परीक्षा दोबारा होगी। हाईकोर्ट ने पं. दीनदयाल उपाध्याय हेल्थ साइंस एंड आयुष विवि के फैसले को बरकरार रखा है।
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रायपुर

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Khyati Parihar

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Updated: 6 Nov 2023, 3:43 PM IST

MD Pediatric exam will be held again Raipur News

दोबारा होगी एमडी पीडियाट्रिक की परीक्षा, गड़बड़ी के बाद रद्द की थी हेल्थ विवि ने

रायपुर। Chhattisgarh News: पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में एमडी पीडियाट्रिक की परीक्षा दोबारा होगी। हाईकोर्ट ने पं. दीनदयाल उपाध्याय हेल्थ साइंस एंड आयुष विवि के फैसले को बरकरार रखा है। विवि ने जुलाई में गड़बड़ी मिलने के बाद परीक्षा रद्द कर दी थी। जबकि रेडियो डायग्नोसिस, मेडिसिन, ऑर्थोपीडिक, जनरल सर्जरी, कैंसर, नेत्र व बाकी विषयों का रिजल्ट जारी कर दिया था। विवि के फैसले के खिलाफ पीडियाट्रिक विभाग के ही परीक्षा दिए कुछ छात्रों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। तीन माह की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने विवि के फैसले को सही ठहराया है।

विवि ने जुलाई में एमडी की परीक्षा रद्द कर दी थी। हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब नए सिरे से उत्तर पुस्तिकाओं की जांच कराई जाएगी। वहीं 11 पीजी छात्रों को दोबारा प्रेक्टिकल करना होगा। उत्तर पुस्तिकाओं की जांच व प्रेक्टिकल के लिए नए सिरे से इंटरनल व एक्सटर्नल नियुक्त किए जाएंगे। इसके लिए विवि ने तैयारी शुरू कर दी है। इस माह के अंत तक थ्योरी व प्रेक्टिकल होने की संभावना है। रिजल्ट दिसंबर में आ सकता है। 2009 में विवि की स्थापना के बाद एमडी-एमएस की परीक्षा पहली बार रद्द की गई थी। मामले की शिकायत सीएम व डिप्टी सीएम हाउस में हुई थी। इसके बाद विवि ने जांच कमेटी बनाई थी। कमेटी ने परीक्षा में गड़बड़ी की पुष्टि की थी और दोबारा परीक्षा कराने की अनुशंसा की थी। पहले पीजी परीक्षा में केवल पास या फेल लिखा जाता था। पिछले तीन साल से विवि ने पीजी की मार्कशीट में नंबर देना शुरू किया है। इससे कई विभागों की पोल खुल रही है। थ्योरी व प्रेक्टिकल में कितने नंबर आ रहे हैं, यह सब मार्कशीट से पता चल जाता है।

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पोस्टिंग में पिछड़ गए छात्र

दरअसल परीक्षा रद्द होने से छात्र परेशान हो गए हैं। वे दो साल की संविदा पोस्टिंग में वे दूसरे विभागों के पास छात्रों से पिछड़ गए हैं। पिछले माह स्वास्थ्य विभाग ने पीजी पास 89 छात्रों की दो साल की संविदा पोस्टिंग की है। दरअसल एमबीबीएस व एमडी-एमएस कोर्स में पास होने के बाद दो साल की ग्रामीण सेवा या संविदा नियुक्ति अनिवार्य है। यह करने के बाद ही विवि छात्रों को स्थायी डिग्री जारी करता है। इसके बाद ही छात्र प्रदेश ही नहीं देश के किसी भी कोने में प्रेक्टिस कर सकता है।

40 से 50 लाख का जुर्माना भी

पीजी पास करने के बाद छात्रों को दो साल की सरकारी सेवा में जाना अनिवार्य किया गया है। ऐसा नहीं करने आरक्षित छात्रों के लिए 40 लाख व अनारक्षित छात्रों के लिए 50 लाख जुर्माना का नियम है। दो साल पहले राजधानी के एक बड़े डॉक्टर की बेटी की शादी थी। इसलिए उन्होंने दो साल की सेवा में जाने के बजाय 50 लाख रुपए जुर्माना जमा किया। कुछ लोग पहुंच का लाभ उठाकर ग्रामीण के बजाय राजधानी व शहरी क्षेत्रों के अस्पतालों में पोस्टिंग करवा लेते हैं।

क्या हुई थी गड़बड़ी

पीडियाट्रिक यानी बाल एवं शिशु रोग विभाग ने सभी 11 छात्रों का प्रेक्टिकल एक ही दिन में करवा लिया था। यह नेशनल मेडिकल कमीशन व विवि के परीक्षा एक्ट के खिलाफ है। एक दिन में केवल 8 छात्रों का प्रेक्टिकल कराया जा सकता है।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद दोबारा थ्योरी परीक्षा व प्रेक्टिकल की तैयारी की जा रही है। इसके लिए जरूरी नियमों का पालन कराया जाएगा। - डॉ. एके चंद्राकर, कुलपति हेल्थ साइंस विवि

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