
विश्व रेबीज डे (फोटो सोर्स- istock)
World Rabies Day 2026: रायपुर@पीलूराम साहू। प्रदेश में आवारा कुत्तों के अलावा बिल्ली, बंदरों के काटने व खरोंचने से रेबीज के मामले लगातार आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में रोजाना ऐसे 425 लोग इसका शिकार हो रहे हैं। हर माह करीब 13 हजार से ज्यादा केस आ रहे हैं। राहत की बात ये है कि आंबेडकर समेत सरकारी अस्पतालों में एंटी रेबीज इंजेक्शन के सभी डोज फ्री में लगाए जा रहे हैं।
28 सितंबर को विश्व रेबीज दिवस है। इस साल विश्व रेबीज दिवस की थीम स्ट्रांगर टूगेदर है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि इंसान, पशु चिकित्सा विभाग व नगर निगम तीनों को एक साथ काम करना होगा। प्रदेश में कुत्ते, बिल्ली व बंदर के काटने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
पिछले साल सबसे ज्यादा मामले रायपुर में 21176, बिलासपुर में 17749, दुर्ग में 14021, कोरबा में 9290 व जशपुर में 9042 केस दर्ज किए गए। रायपुर प्रदेश का सबसे बड़ा हॉट स्पॉट बन गया है। सिर्फ रायपुर शहर की बात करें तो 2026 के पहले 5 महीनों में ही 2,384 मामले आ चुके हैं। पूरे प्रदेश का औसत देखें तो हर दिन 425 लोगों को कुत्ते काट रहे हैं। लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी नगर निगम कुत्तों की नसबंदी करने में फेल है।
लोग सबसे बड़ी गलती यही करते हैं कि बिल्ली की खरोंच व बंदर के काटने को हल्के में ले लेते हैं। राजधानी में पालतू बिल्लियों का क्रेज बढ़ा है। बिल्ली के नाखून में रेबीज वायरस महीनों तक रह सकता है। छोटी सी खरोंच से भी वायरस घाव में जा सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि कुत्ते के बाद सबसे ज्यादा रेबीज का खतरा बिल्ली से ही है।
रायपुर, डोंगरगढ़, सिरपुर में बंदर के काटने के केस आए दिन आ रहे हैं। लोग टिटनेस लगवाकर छोड़ देते हैं, जबकि बंदर भी स्तनधारी है और उसकी लार से भी रेबीज होता है। उसे भी कुत्ते की तरह ही कैटेगरी तीन में मानकर पूरा टीका व जरूरत पड़ने पर इम्युनोग्लोबुलिन लगवाना जरूरी है। अगर किसी पागल कुत्ते ने आपकी गाय, बकरी या कुत्ते को काटा है और उसकी लार आपके घाव पर लग गई तो भी रेबीज हो सकता है।
वर्ष केस
2023 - 114472
2024 - 135231
2025 - 155344
डॉ. योगेंद्र मल्होत्रा, सीनियर प्रोफेसर मेडिसिन आंबेडकर अस्पताल के मुताबिक, डॉग बाइट हो या बिल्ली व बंदर, काटने व खरोंचने पर एंटी रेबीज वैक्सीन जरूर लगवाएं। ऐसा नहीं करने पर रेबीज का रिस्क बढ़ सकता है। पालतू कुत्तों व बिल्लियों को समय-समय पर वैक्सीन लगवाएं। अस्पताल में डॉग बाइट के काफी केस आते हैं। जिस मरीज को रेबीज हो जाए, उनके इलाज में काफी दिक्कत होती है। यह एक से दूसरे लोगों भी फैलता है। आंबेडकर समेत सरकारी अस्पतालों में एंटी रेबीज वैक्सीन फ्री है।
Updated on:
27 Sept 2026 01:06 pm
Published on:
27 Sept 2026 01:06 pm
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