सुबह उठने पर यात्री देखते हैं कि उनका झोला, बैग कुतरा जा चुका है। जबकि, दावा ये किया जाता है कि मैकेनाइजल्ड वॉङ्क्षशग सिस्टम से यात्रियों को सुविधाएं मुहैया कराई जाती है। सवाल उठता है कि जब यात्री ट्रेनें कोङ्क्षचग डिपो में धुलाई, मेंटेनेंस के लिए जाती हैं, तब ये काम ठीक से कराया क्यों नहीं जाता है। गरीब रथ एक्सप्रेस को तो रायपुर स्टेशन में ही हल्का-फुल्का मेंटेनेंस करके रवाना कर दिया जाता है। इस ट्रेन में कई साल पुराने बर्थ लगे हुए हैं, उसे भी इकोनॉमी कोच में तब्दील नहीं किया जा रहा है। कोच में ही चूहे जहां-तहां छुपे रहते हैं और रात में यात्रियों को नुकसान पहुंचाते हैं। यहां तक बर्थ और खिड़कियों में लगे पर्दे भी कुतरते हैं।