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Sharad Purnima 2026: शरद पूर्णिमा पर रायपुर में सजेगा विशेष दरबार, जानिए क्यों खास है इस रात चांदनी में रखी खीर का सेवन

Kojagari Purnima celebration Raipur: 25 अक्टूबर 2026 को छत्तीसगढ़ में शरद पूर्णिमा (कोजागरी पूर्णिमा) का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा।
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रायपुर

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Shradha Jaiswal

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Updated: 23 Oct 2026, 5:59 PM IST

Sharad Purnima 2026

Sharad Purnima 2026: शरद पूर्णिमा पर रायपुर में सजेगा विशेष दरबार(photo-patrika)

Sharad Purnima 2026: आश्विन शुक्ल पूर्णिमा की निर्मल रात, गगन में पूर्ण कलाओं से दमकता चंद्रमा और उसकी धवल चांदनी के नीचे रखी खीर… आगामी 25 अक्टूबर 2026 को शरद पूर्णिमा (कोजागरी पूर्णिमा) का पर्व राजधानी रायपुर समेत पूरे छत्तीसगढ़ में अपार श्रद्धा व उत्साह के साथ मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पावन रात्रि में चंद्रमा की किरणों से अमृत रस बरसता है। इसी परंपरा के तहत नगर के ऐतिहासिक मंदिरों और घरों में छतों व खुले प्रांगणों में खीर रखकर चंद्रदेव को अर्घ्य दिया जाएगा। साथ ही भगवान विष्णु, माता महालक्ष्मी और राधा-कृष्ण की विशेष पूजा-अर्चना के बाद भक्तों में महाप्रसाद का वितरण होगा।

Sharad Purnima 2026 Raipur: ब्रज परंपरा और महारास: प्रेम व भक्ति का दिव्य संगम

शरद पूर्णिमा को 'रास पूर्णिमा' भी कहा जाता है। पौराणिक आख्यानों के अनुसार, इसी मनोरम ज्योत्स्ना रात में भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन में गोपियों संग महारास रचाया था। मुरलीधर की मधुर तान और गोपियों के दिव्य समर्पण की यह गाथा इस पर्व को प्रेम, निष्ठा और आत्मिक संतुलन का प्रतीक बनाती है। इसके अलावा, छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति में इसे नई फसल के आगमन और सुख-समृद्धि के स्वागत पर्व के रूप में भी देखा जाता है।

राजधानी के मंदिरों में सजेगा दरबार, बंटेगा अमृत प्रसाद

शरद पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर राजधानी रायपुर के ऐतिहासिक व प्रमुख मंदिरों में विशेष उत्सव की तैयारियां जोरों पर हैं। प्राचीन दूधाधारी मठ और महामाया मंदिर में भव्य श्रृंगार के साथ महाआरती का आयोजन किया जाएगा। वहीं, समता कॉलोनी स्थित श्री राधा-कृष्ण मंदिर, गायत्री नगर जगन्नाथ मंदिर और वीआईपी रोड स्थित श्रीराम मंदिर में संध्या काल से ही खुले प्रांगण में विशेष पात्रों में दूध-चावल की खीर रखी जाएगी।

मध्यरात्रि में भगवान की आरती के पश्चात इस खीर को 'अमृत प्रसाद' के रूप में श्रद्धालुओं में वितरित किया जाएगा। पर्व की इस पावन बेला में शहर के कई मंदिरों और परिसरों में सामूहिक भजन संध्या और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के तहत डांडिया-उत्सव का भी विशेष आयोजन किया जाएगा, जिससे पूरा शहर भक्तिमय रंग में सराबोर नजर आएगा।

16 कलाओं का चंद्रमा और स्वास्थ्य का संतुलन

महामाया मंदिर के ज्योतिषाचार्य पं. मनोज शुक्ला के अनुसार, शरद पूर्णिमा वर्ष की एकमात्र ऐसी पूर्णिमा है जब चंद्रमा अपनी संपूर्ण 16 कलाओं से परिपूर्ण होकर पृथ्वी के सबसे निकट होता है। इस रात की शीतल चांदनी मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है। आश्विन मास में पित्त का प्रकोप बढ़ता है, इसलिए शीतल चांदनी में रखी खीर का सेवन स्वास्थ्य और आध्यात्मिक दोनों दृष्टियों से बेहद लाभप्रद माना जाता है।

महालक्ष्मी पूजन और रात्रि जागरण का विधान

मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात्रि में धन और वैभव की अधिष्ठात्री माता महालक्ष्मी 'को जागर्ति' (कौन जाग रहा है) कहते हुए भूलोक पर विचरण करती हैं। जो श्रद्धालु रात्रि जागरण कर घरों के मुख्य द्वार पर दीप प्रज्ज्वलित करते हैं तथा श्रीसूक्त व कनकधारा स्त्रोत का पाठ करते हैं, उनके घर में मां लक्ष्मी का स्थायी वास होता है और असीम कृपा बरसती है।