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सोशल मीडिया ने बच्चों को किया अनसोशल, रिश्तों में बन रही दूरियां, सामने आए कई केस

Raipur News: सोशल मीडिया ने लोगों को अनसोशल कर दिया है। वर्चुअल दुनिया में जीते हुए लोग रियलिटी से दूर होने लगे हैं। इसके चलते रिश्तों में दूरियां बढ़ रहीं हैं।
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रायपुर

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Khyati Parihar

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Updated: 24 Jun 2023, 2:32 PM IST

effect of social media on children:

सोशल मीडिया ने बच्चों को किया अनसोशल

Effect Of Social Media On Children: रायपुर। सोशल मीडिया ने लोगों को अनसोशल कर दिया है। वर्चुअल दुनिया में जीते हुए लोग रियलिटी से दूर होने लगे हैं। इसके चलते रिश्तों में दूरियां बढ़ रहीं हैं। नतीजतन लोगों में तनाव भी बढ़ रहा है। आंबेडकर अस्पताल के मनोरोग विभाग में रोज ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। सोशल मीडिया के चलते सबसे ज्यादा किशोरों के मन पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।

यानी 14 से 18 साल के बीच। दरअसल, सोशल मीडिया पर दिखने वाली दूसरों की लाइफ स्टाइल को फॉलो करने बच्चों में इस कदर दीवानगी है कि वे इसके लिए किसी भी हद तक गुजरने को तैयार हैं। तमाम कोशिशों केे बावजूद जब वे खुद को उस तरह नहीं दिखा पाते तो निराश (social media) होने लगते हैं। मनोचिकित्सकों की मानें तो बच्चों को समय रहते इस लत से छुटकारा नहीं दिलाया गया तो वे नशे के आदि हो सकते हैं। कई बार ऐसे बच्चे दूसरों के साथ खुद को भी नुकसान पहुंचाने की स्थिति में पहुंच जाते हैं। आंबेडकर अस्पताल में ऐसे मामलों की बड़ी गंभीरता से जांच और इलाज किया जा रहा है।

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लाइक्स के फेर में डिमोटिवेट हो रहे युवा

बच्चे ही नहीं, युवा भी सोशल मीडिया की वजह से तनाव में हैं। डॉक्टरों के अनुसार, किसी पोस्ट पर कितने लाइक आते हैं? युवाओं के लिए ये काफी बड़ा फैक्टर है। वर्चुअल लाइक्स से वे तय कर लेते हैं कि उन्हें वास्तव में कितना पसंद-नापसंद किया जाता है। भले ही इसका सच (cg news) से कोई सरोकार न हो। कई बार अपने में कम और दूसरों की पोस्ट में ज्यादा लाइक देखकर भी युवा डिमोटिवेट हो जाते हैं। लंबे समय तक ऐसा महसूस करने पर वे डिप्रेशन का भी शिकार हो सकते हैं।

केस स्टडी

खाना-पीना छोड़ा, घर में सबसे बातचीत भी बंद

न्यू राजेंद्र नगर में रहने वाला 16 साल का किशोर सोशल मीडिया पर एक दोस्त के संपर्क में था। एक साल की वर्चुअल दोस्ती इतनी अहम हो गई कि आईडी ब्लॉक किए जाने पर उसने घर में सबसे बातचीत बंद कर दी। खाना-पीना भी छोड़ दिया। अभिभावक उसे मनोचिकित्सक के पास लेकर पहुंचे। 2 हफ्ते की काउंसिलिंग में डॉक्टरों ने उसे यही समझाया कि असल दोस्त बनाए। उनसे बातचीत करे। दवाइयां भी दी।

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अपने ही नहीं, दूसरों के तनाव का भी कारण बने

पंडरी की एक महिला बीते दिनों साइकाट्रिस्ट पास पहुंची। बताया कि तनाव में हूं। कारण पूछने पर कहा कि कोई बातचीत करने वाला नहीं है। बेटे की सालभर पहले शादी हुई है। वह सुबह ड्यूटी चला जाता है। बहू और मैं घर पर रहते हैं। झाड़ू-पोंछा से लेकर खाना (raipur news) बनाने तक का सारा काम वह मोबाइल इस्तेमाल करते हुए करती है। काम खत्म कर बेडरूम जाती है तो वहां भी मोबाइल में व्यस्त। डॉक्टर ने उन्हें दवाइयां देने के साथ बेटे-बहू को भी समझाया कि उनके साथ कुछ वक्त बिताएं।

एक्सपर्ट की सलाह मेंटल हैल्थ जरूरी

2012 के बाद से मेंटल हैल्थ पर जोर देने वाले संकेतों को युवाओं ने नजरअंदाज कर दिया है। डॉक्टर केवल दवाइयां लिख सकते हैं। सलाह दे सकते हैं। सोशल मीडिया का कितना इस्तेमाल करना है, ये खुद को ही तय करना होगा। इस लत से लोग एंग्जाइटी और डिप्रेशन के शिकार हो रहे हैं। ये आत्महत्या का कारण भी बन सकता है।

- डॉ. सुरभि दुबे, साइकाट्रिस्ट, आंबेडकर अस्पताल, रायपुर

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