2 नवंबर 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

मिड डे मील पर पड़ी मंहगाई की मार, परोसी जा रही पतली दाल

मिड डे मील पर पड़ी मंहगाई की मार, परोसी जा रही पतली दाल
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

रायसेन

•

image

Shibu lal yadav

•

Updated: 8 Sep 2018, 10:35 AM IST

mid day meal

मिड डे मील पर पड़ी मंहगाई की मार, परोसी जा रही पतली दाल

रायसेन. सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राओं की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने मध्यान्ह भोजन योजना की शुरूआत की थी। लेकिन खाद्यान्न व तेलों पर महंगाई के कारण बच्चों को परोसे जाने वाली दाल भी अब पतली हो गई है।वहीं बढ़ रही कीमतों के कारण मिड-डे मील का जायका भी बदल गया है। इस वजह से बच्चे इसे खाने की बजाय फेंकने का काम भी करने लगे हैं।जिससे इस महत्वाकांक्षी योजना पर ग्रहण लगना शुरू हो गया है।

खाद्यान्न, तेल के दामों में बढ़ोत्तरी
दरअसल मध्यान्ह भोजन को बनाने में इस्तेमाल किए जाने वाले गेहूं, चावल सहित दालों और तेल की कीमतों में बढ़ोत्तरी हो चुकी है। इसीलिए अब मिड-डे मील की दाल रोटी पतली होने लगी है। वहीं खीर व पुलाव में इस्तेमाल किया जाने वाला चावल भी बेहद घटिया किस्म के होते हैं। इस घटिया मध्यान्ह भोजन को खाने में बच्चे अरूचि दिखाने लगे हैं। दाम बढऩे के कारण थाली से चावल, दाल कम मात्रा में परोसी जा रही है। इसका असर अब स्कूलों के मिड-डे मील पर पडऩे लगा है। शासन द्वारा निर्धारित मीनू की बंदिश के बीच मध्यान्ह भोजन को परोसने वाले महिला-स्व सहायता समूहों ने भी बढ़ती महंगाई की वजह से दाल पतली कर दी है। इन शासकीय प्राइमरी और मिडिल स्कूलों सहित मदरसों, आंगनबाडिय़ों में मध्यान्ह भोजन परोसा तो जा रहा है। लेकिन महंगाई डायन की वजह से मिड-डे मील का अब जायका ही बदलने लगा है।

सप्ताह में चार दिन बांटी जाती है दाल
सोमवार: रोटी के साथ तुअर दाल और काबुली चने व टमाटर की सब्जी।
बुधवार: रोटी के साथ चने की दाल एवं मिक्स सब्जी।
शुक्रवार: रोटी के साथ मूंग की दाल और हरे सूखे मटर,चने की सब्जी।
शनिवार: पराठा के साथ मिक्स दाल व मिक्स सब्जी का मीन्यू है।

यहां बच्चों को मिल रही सिर्फ दाल रोटी, चावल
शुक्रवार को जब मीडियाकर्मियों की टीम ने शहर के शासकीय मिडिल स्कूल नरापुरा, शासकीय कन्या प्राइमरी स्कूल और शासकीय कन्या माध्यमिक स्कूल में जाकर देखा तो बच्चों को सिर्फ दाल रोटी चावल ही परोसते मिले। स्व- सहायता समूह के संचालक शासन द्वारा निर्धारित मीन्यू का पालन तक नहीं कर रहे हैं। यह सब खेल स्कूलों के जिम्मेदार हेडमास्टर शिक्षकों की मिलीभगत से चल रहा है।

हम मध्यान्ह भोजन की क्वालिटी की बीच- बीच में इन स्कूलों में पहुंचकर जांच-पड़ताल भी करते हैं। राशन से आने वाले यदि गेहूं चावल घटिया आ जाते हैं तो उनके बदलने के निर्देश हेडमास्टरों को दिए जाते हैं। अगर दाल रोटियां पतली परोसी जा रही है तो इसकी मॉनीटरिंग कर दोषियों पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

विजय कुमार नेमा डीपीसी रायसेन