
ऐसे सुधर सकती है स्कूलों की हालत, इन खास लोगों का है इंतजार
रायसेन@शिवलाल यादव की रिपोर्ट...
जिले के सरकारी स्कूलों की हालत सुधारने और यहां सुविधाएं जुटाने के लिए दानदाताओं का इंतजार है। हालांकि इस साल भी एक मंडीदीप की एक निजी कंपनी के दानदाता अधिकारियों ने दो शासकीय मिडिल स्कूलों में साइंस लैब और कम्प्यूटर लैब बनवाने का साहस जुटाया है। बल्कि कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों ने कलेक्टर रायसेन, शिक्षा मिशन के डीपीसी विजय नेमा को अपनी सहमति पत्र भेजकर सहमति भी जतायी है। जल्द ही इन स्कूलों की सूरत बदली बदली सी नजर आएगी।
मालूम हो कि मप्र सरकार द्वारा सभी सरकारी पहली से बारहवीं तक के स्कूलों में जरूरी चीजों की पूर्ति के लिए उपहार योजना शुरू की है। इस अभिनव योजना से अब सरकारी स्कूलों में जरूरी सुविधाएं दानदाता देने आगे आने लगे हैं। लेकिन इसमें काबिले गौर फरमाने वाली बात तो यह है कि एक दो सरकारी स्कूलोंको छोड़कर सभी स्कूलों में उपहार योजना के तहत दानदाताओं की जरूरत है।
दानदाताओं को सरकारी स्कूली की सूरत सुधारने आगे आना होगा....
इन सरकारी स्कूलों और छात्रावासों में गरीब छात्र-छात्राओं को बैठने के लिए ना तो पर्याप्त फर्नीचर है और ना सीलिंग फेन, वाटर कूलर, नल पानी की टंकी, कम्प्यूटर लैब आदि मौजूद नहीं हैं। इन स्कूलों में अन्य छोटी बड़ी चीजों की बेहद जरूरत है। जिला शिक्षा विभाग और डीपीसी कार्यालय रायसेन ने उपहार योजना चलाकर दानदाताओं को दान में चीजें देने का आग्रह भी किया था। लेकिन करीब तीन साल बीत जाने के बाद भी दानदाताओं ने उपहार देकर इन स्कूलों में सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने की बेहतर पहल नहीं की है।
जिससे सरकारी स्कूलों की इस उपहार योजना पर पानी फिरता नजर आ रहा है। डीपीसी विजय नेमा ने बताया कि हाल ही में मंडीदीप की एक निजी कंपनी के अधिकारियों द्वारा सहमति पत्र देकर मदद देने का वायदा किया है। इस सहमति के आधार पर एक शासकीय बालक मिडिल स्कूल सहित एक गांव के सरकारी मिडिल स्कूल में साइंस लैब व कम्प्यूटर लैब बनवाने जा रहे हैं। जबकि पिछले साल जिले की तहसील गैरतगंज के सरकारी स्कूल सहित मंडीदीप के करीब 10 सरकारी स्कूलों को कायाकल्प करने का बीड़ा उठाया था। इन स्कूलों में दानदाताओं ने लगभग ३ लाख६० हजार रूपए के उपहार देकर सुविधाओं की सौगात दी थी ।लेकिन इस साल अभी सरकारी स्कू लों की सूरत सुधारने के लिए दानदाताओं का बेसब्री से इंतजार हो रहा है।दानदाताओं को इनसे पे्ररणा लेकर मदद करना चाहिए।
उपहार योजना में यह मांगा
दरअसल उपहार योजना में मप्र शासन की तरफ से निर्धारित वस्तुएं जैसे छात्रावास के किचन, के लिए रसोई गैस चूल्हे, सिलेंडर, बर्तन थालियां, शुद्ध पेयजन के लिए फिल्टर नल कनेक्शन, वाटर कूलर, सरकारी स्कूलों की आवाश्यकता के अनुरूप फर्नीचर उपलब्ध कराना, खेल मैदान के जमीन देकर उसे बनवाकर देना, खेल सामग्री देना,प्ले ग्राउंड का समतली करण कर उसे बनवा कर सौगात देना आदि शामिल हैं।
दान में सरकारी स्कूलों को यह भी मिला ...
शिक्षा विभाग, डीपीसी के अधिकारियों की अगर हम मानें तो पिछले साल भीगिनती के इन सरकारी स्कूलों में कुछ दानदातओं ने ही उपहार देकर मदद की थी । लेकिन सूची से हटकर दान मिल सका। जो दान मिला इनमें कॉपी किताबें, बस्ते पानी की बाटलें, यूनीफॉर्म, जूते चप्पलें आदि शामिल हैं। यदि हम विभागीय अधिकारियों की मानें तो इन सरकारी स्कूलों में साइंस लैब, फर्नीचर पंखों आदि की ज्यादा जरूरत है।
उपहार येाजना में दानदाता दान देने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं। पिछले साल जिन लोगों ने जो वस्तुएं दान में दीं। वह दान सूची से हटकर है। हालांकि यह अच्छी बात है लेकिन अब इन सरकारी कई स्कूलों में जरूरी सुविधाओं की आज भी जरूरत है। लेकिन दानदाताओं ने यहां सुविधाएं उपलब्ध कराने में कोई रूचि नहीं दिखाई है।
विजय कुमार नेमा, डीपीसी रायसेन
Published on:
21 Jun 2018, 12:19 PM IST
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