
Rajgarh Asptal : राजगढ़ जिला अस्पताल में प्रसूता की मौत हो गई। इसके बाद परिजन ने हंगामा कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रसूता को न डॉक्टर ने देखा, न नर्स ने। परिजन ने बताया कि मेरी बहू को रात में डिलीवरी हुई, सब कुछ सामान्य था लेकिन अचानक उसे खूब रक्तस्राव होने लगा। मैंने स्टाफ को बताया तो उन्होंने चेक कर कहा कि इनके वस्त्र बदल दीजिए। दोबारा गई तो मेडम ने कहा कि मुझे बार बार परेशान मत करो, अब सुबह देखेंगे। जिला अस्पताल में महिला की मौत और इसके बाद परिजन के हंगामे की खबर सुनकर प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी सक्रिय हो गए। एसडीएम, तहसीलदार व टीआई मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से बात की। लोगों ने स्पष्ट आरोप लगाया कि प्रसूता को न किसी डॉक्टर ने देखा और न ही नर्स ने उसकी सुध ली। लापरवाही के कारण वह मर गई। प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी परिजन को समझाने की कोशिश कर रहे हैं। प्रसूता की मौत की वजह अत्यधिक ब्लीडिंग बताई जा रही है। इधर नवजात पूरी तरह स्वस्थ है।
राजगढ़ से राजेश विश्वकर्मा ने मौके से बताया कि जिला अस्पताल में प्रसव के बाद प्रसूता की मौत के बाद रविवार सुबह जमकर हंगामा हुआ। परिजन ने ड्यूटी डॉक्टर और नर्सिंग स्टाॅफ पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि प्रसव के बाद प्रसूता अमरीबाई तंवर (19) को ब्लीडिंग होती रही। सास सहित परिजन रातभर स्टाफ से मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन समय पर उपचार नहीं मिला। रविवार अलसुबह करीब 3 बजे प्रसूता ने दम तोड़ दिया।
मौत की खबर मिलते ही परिजन सुबह करीब 8 बजे अस्पताल पहुंच गए और हंगामा शुरू कर दिया। पूर्व विधायक हेमराज कल्पोनी और बापूसिंह तंवर भी परिजन के समर्थन में अस्पताल पहुंचे। उन्होंने मामले में जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। अब प्रसूता की मौत के मामले में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और परिजन के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रसव के बाद शुरू हुए अत्यधिक रक्तस्राव के दौरान प्रसूता को समय पर आवश्यक उपचार मिला या नहीं।
जानकारी के अनुसार अमेरपुरा निवासी अमरीबाई पति दिनेश तंवर (19) को शनिवार रात प्रसव के लिए जिला अस्पताल लाया गया था। यह उसका पहला प्रसव था। आधी रात के बाद उसका सामान्य प्रसव हुआ और उसने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। इसके बाद उसे सामान्य वार्ड में भर्ती कर दिया गया। परिजन के अनुसार कुछ देर बाद अमरीबाई को तेज रक्तस्राव शुरू हो गया। सास धापूबाई का आरोप है कि उन्होंने नर्सिंग स्टाॅफ को कई बार इसकी जानकारी दी, लेकिन शुरुआत में इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। हालत बिगड़ने के बाद स्टाॅफ सक्रिय हुआ, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।
अमरीबाई की सास धापूबाई ने ड्यूटी नर्स पर कथित अभद्र व्यवहार का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि रक्तस्राव के कारण बहू के कपड़े भीग रहे थे। उन्होंने नर्सिंग स्टाॅफ को स्थिति बताई, लेकिन उन्होंने गंभीरता नहीं दिखाई। उल्टा मुझे डांटकर भगा दिया कि सब ठीक हो जाएगा, 'खून ही तो बह रहा उसे नल थोड़े चल रहा है।' इस बात को लेकर महिला काफी आहत हुई लेकिन रिश्वत ले चुके नर्सिंग स्टॉफ ने जरा भी गंभीरता नहीं दिखाई। परिजन का आरोप है कि लगातार रक्तस्राव के बावजूद प्रसूता को समय पर उपचार नहीं मिला। जब उसकी मौत हो गई, तब अस्पताल का स्टाफ सक्रिय हुआ।
प्रसूता की सास धापूबाई के अनुसार वह दो-तीन बार नर्सिंग स्टाॅफ को बता चुकी थीं कि बहू का रक्तस्राव बंद नहीं हो रहा है। उन्होंने कपड़े भी दिखाए, लेकिन कथित तौर पर उन्हें सुबह देखने की बात कहकर वापस भेज दिया गया। सास का आरोप है कि नर्स ने उन्हें बार-बार परेशान नहीं करने और वापस नहीं आने की बात कही। परिजन के अनुसार इसी दौरान प्रसूता की हालत लगातार बिगड़ती रही।
हंगामे के दौरान परिजन ने प्रसव से पहले रुपए लिए जाने का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि नर्स ने 1500 रुपए और सफाईकर्मी ने 500 रुपए मांगे। परिजन के अनुसार रुपए देने के बाद ही प्रसव कराया गया। परिजन ने बच्चे की स्थिति को लेकर भी प्रसव से पहले अलग-अलग बातें बताए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बच्चा टेढ़ा है, उल्टा है, गले में नाल निपटी हुई है, इत्यादि। जैसे ही रुपए दिए तो सब बहाने खत्म हो गए।
परिजन ने नर्सिंग स्टाॅफ पर कथित तौर पर अपमानजनक व्यवहार का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि नर्स ने उनसे कहा कि 'तुम लोगों से बदबू आ रही है, दूर रहो।' परिजन का कहना है कि वे दिनभर सोयाबीन की कटाई कर अस्पताल पहुंचे थे। उनका परिवार मजदूरी करता है। ऐसे समय में जब प्रसूता की हालत गंभीर थी, इस तरह का व्यवहार और अधिक पीड़ादायक था।
अमरीबाई का पति दिनेश तंवर (21) मजदूरी के लिए जोधपुर जा रहा था। सामान्य प्रसव की जानकारी मिलने के बाद वह रात की बस से रवाना हो गया था। बाद में पत्नी की हालत बिगड़ने की सूचना मिली तो परिजन ने उसे रास्ते से वापस बुलाया। दिनेश के अनुसार उसे अंदाजा नहीं था कि सामान्य प्रसव के कुछ घंटे बाद ही हालात इतने बिगड़ जाएंगे।
हंगामे की सूचना पर तहसीलदार विनीत गोयल और कोतवाली टीआई मंजू मखेनिया मौके पर पहुंचीं। परिजन एसडीएम को बुलाने की मांग पर अड़े रहे। इसके बाद एसडीएम निधि भारद्वाज अस्पताल पहुंचीं और परिजन से चर्चा की। एसडीएम ने परिजन के बयान लेने और मामले की हर स्तर पर जांच कराने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि जिसकी भी लापरवाही सामने आएगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। शासन स्तर से मिलने वाली आर्थिक सहायता दिलाने का भी भरोसा दिया गया। फिलहाल रेडक्रॉस से सहायता राशि देने की बात कही गई। आश्वासन के बाद परिजन शांत हुए। इसके बाद प्रसूता का पोस्टमॉर्टम कराया गया और शव परिजन को सौंप दिया गया।
Updated on:
04 Oct 2026 11:24 am
Published on:
04 Oct 2026 09:27 am
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