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18 जनवरी को मृत घोषित, 20 जनवरी को मृत्यु, अक्टूबर तक मिलता रहा वेतन, राजगढ़ में स्वास्थ्य विभाग का कारनामा

MP Health Department Blunder : ढाबला स्वास्थ्य केंद्र की महिला सफाईकर्मी की मौत 20 जनवरी 2025 को हुई, विभाग ने पत्र 18 जनवरी को ही जारी कर दिया, यानी उन्हें दो दिन पहले ही मार दिया।
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MP Health Department Blunder

राजगढ़ जिला चिकित्सालय का दृष्य (फोटो सोर्स: Patrika)

राजेश विश्वकर्मा की रिपोर्ट

Rajgarh News : आपको ये जानकर हैरानी होगी कि, मध्य प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग अपने कर्मचारियों की कार्यकुशलता के साथ ही उनकी मौत की घोषणा भी पहले ही कर देता है। अभी तक आपने काम को लेकर विभागीय लापरवाही के किस्से सुने होंगे, लेकिन यहां एक कर्मचारी को विभाग के जिम्मेदारों ने उनकी असल मृत्यु के दिन से दो दिन पहले ही मार दिया। बात यहीं खत्म नहीं हुई, मृत्यु के करीब 10 माह बाद भी कर्मचारी को वेतन दिया जाता रहा।

ये पूरा मामला राजगढ़ जिले के ढाबला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का है। यहां की महिला सफाईकर्मी सुमित्राबाई की मौत 20 जनवरी 2025 को हो गई थी। बकायदा इसका मृत्यु प्रमाण पत्र भी दिया गया, लेकिन जब स्वास्थ्य केंद्र के मेडिकल ऑफिसर और सीबीएमओ ने ये पत्र विभाग को पहुंचाया तो उसमें तारीख 18 जनवरी 2025 लिखी थी। वहीं, इस लिखे हुए पत्र को 3 फरवरी 2025 को प्राप्त किया गया। यानी महिला की असल में मौत 20 जनवरी को हुई, लेकिन विभाग ने उन्हें अपने दस्तावेजों में 18 जनवरी को ही मार दिया।

अक्टूबर तक विभाग देता रहा वेतन

लापरवाही की इंतेहां यहीं खत्म नहीं होती, उक्त महिला का वेतन अक्टूबर-2025 तक निकलता रहा। जब इस मामले की शिकायत हुई तो जांच बैठी, इसके बाद हाल ही में सीएमएचओ डॉ. शोभा पटेल और लेखापाल दिनेश पारीक को निलंबित किया गया। लेकिन, महिला को दो दिन पहले मारने वालों पर न तो अबतक कोई कार्रवाई हुई और न ही उन्हें जांच के दायरे में लिया गया है।

जांच भी अधूरी : 4 माह कार्रवाई से दूर रही CMHO

वेतन निकलने संबंधी शिकायत के बाद आयुक्त ने 3 सदस्यी दल गठित हुआ, जिसमें आरडी समेत अन्य अधिकारी थे। उन्होंने जांच में पाया कि, प्रकरण में सीएमएचओ डॉ. शोभा पटेल, तत्कालीन लेखापाल रामगोपाल नरेड़ा और लेखापाल दिनेश पारीक दोषी पाए गए। हालांकि, जिस समय ये वेतन निकल रहा था, उस दौरान राजगढ़ में सीएमएचओ डॉ. किरण वाडिवा थीं, जो कि मौजूदा समय में रतमाल में सीएमएचओ हैं।

यानी जनवरी 2025 से 17 जून 2025 तक वेतन उन्हीं की मौजूदगी में निकला, इसके बाद डॉ. शोभा पटेल ने 18 जून 2025 को ज्वॉइन किया। यानी इस पूरी कार्रवाई में जांच दल ने तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. वाडिवा से पूछा तक नहीं, साथ ही दो दिन पहले जिस महिला सफाईकर्मी को मार दिया गया, उस मामले में भी जिम्मेदारी तय नहीं की, जबकि डॉ. पटेल और लेखापाल पारीक के निलंबन पत्र, दोनों में महिला की मौत की तारीखें अलग हैं। ऐसे में पूरी जांच पर भी यहां सवाल खड़े हो रहे हैं।

भोपाल से क्षेत्रीय स्वास्थ्य संचालक डॉ. नीरा चौधरी से सीधी बातचीत

सवाल: राजगढ़ सीएमएचओ-लेखापाल निलंबित हुए हैं, उन्होंने विभाग की कर्मचारी को दो दिन पहले ही मार दिया?
जवाब: आप से ये पहली बार सुन रही हूं, आप लिखकर भेज दीजिए, हम उसकी भी जांच करेंगे।

सवाल: मौजूदा समय में रतलाम सीएमएचओ डॉ. वाडिवा के दौरान वेतन निकलता रहा, लेकिन उन्हें जांच में क्यों नहीं लिया गया?
जवाब: अगर ऐसा है तो आप हेल्थ कमिश्नर से​ शिकायत कर दीजिए, जो दस्तावेज हैं, उन्हें दे दीजिए।

सवाल: आपके विभागीय पत्र में महिला की मौत को लेकर दो तरह की तारीख दर्ज हैं। इसके दस्तावेज भी मेरे पास ये आपको दे दूं?
सवाल: नहीं मुझे देने से कुछ नहीं होगा, आपको हेल्थ कमिश्नर से लिखित शिकायत करना पड़ेगी।

सवाल: मैं जर्नलिस्ट हूं, मैं शिकायती आवेदन क्यों दूंगा, मैं ये लापरवाही आपसे साझा कर रहा हूं?
जवाब: ठीक है, आप भेज दी​जिए, मैं कमिश्नर सर को बता दूंगी, जैसा वे बताएंगे वैसा मैं कर लूंगी।