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STRESS IN RAJSAMAND : धर्मस्थल की जमीन विवाद में नया मोड़ : ग्रामीणों ने पूर्व जनप्रतिनिधियों पर उठाए दोहरी राजनीति के आरोप

शहर शांत, तरसिंगड़ा में एतियात के तौर पर तैनात रहा पुलिस जाब्ता
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राजसमंद. तरसिंगड़ा में धर्मस्थल को ध्वस्त करने पर विवाद के बाद गुरुवार को गांव से लेकर शहर तक शांति व्यवस्था कायम रही, लेकिन धर्मस्थल की जगह को लेकर पंचायत के पूर्व जनप्रतिनिधियों और दोनों समुदाय के लोगों के बीच नया विवाद छिड़ गया है। ग्राम पंचायत के दोहरे निर्णय को लेकर भी लोगों ने सवाल उठाए हैं।

जानकारी के अनुसार तरसिंगड़ा में चरागाह जमीन पर धर्मस्थल को प्रशासन ने ध्वस्त कर मूर्ति को कब्जे में ले ली। इसको लेकर एक समुदाय के लोग विरोध में खड़े हो गए, तो जिला प्रशासन द्वारा ग्राम पंचायत से प्रस्ताव आने पर कानून के मुताबिक सरकारी जमीन धर्मस्थल के लिए आवंटित करने का आश्वासन दिया। इसके साथ ही भावा ग्राम पंचायत ने बुधवार को विशेष ग्रामसभा आयोजित कर तरसिंगड़ा की चरागाह जमीन को धर्मस्थल के लिए आंवटित करने का प्रस्ताव ले लिया। संपूर्ण घटनाक्रम को लेकर कांकरोली थाना पुलिस द्वारा भी अलग से जांच की जा रही है। इधर, तरसिंगड़ा व बाघपुरा में धर्मस्थलों पर तोडफ़ोड़ के बाद शांति एवं कानून व्यवस्था के लिहाज से अतिरिक्त पुलिस जाब्ता गुरुवार को भी तैनात रहा। साथ ही संवदेनशील इलाके में भी पुलिस की गश्त रही।

पूर्व पंचायत समिति सदस्य पर कार्रवाई की मांग
कुंवारिया. तरसिंगड़ा में धर्मस्थल ध्वस्त करने के बाद उपजे विवाद के लिए पूर्व पंचायत समिति सदस्य जवाहर जाट व पूर्व सरपंच शंकरीदेवी को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर ग्रामीणों ने कलक्टर को ज्ञापन दिया। भावा उप सरपंच जगदीश गुर्जर, सुरेशचन्द्र, शंकर लाल, भानु, चुन्नीलाल, देवी लाल भील ने कलक्टर को दिए ज्ञापन में बताया कि भावा पूर्व सरपंच शंकरीदेवी ने ८ दिसम्बर २०१० को प्रशासन गांवों के संघ अभियान में तरङ्क्षसगडा में आराजी न. ९५ में एक बीघा दस बिस्वा भूमि मुस्लिम समाज को ईदगाह के लिए आवंटन के लिए एनओसी दी। अब उन्हीं पूर्व सरपंच शंकरीदेवी के पति व पूर्व पंचायत समिति सदस्य जवाहरलाल जाट द्वारा उसी जमीन पर दूसरे समाज का धर्मस्थल बनाने का प्रस्ताव लेकर अशांति फैलाने का प्रयास किया जा रहा है। ग्रामीणों ने साम्प्रदायिक माहौल बिगाडऩे व उकसाने के आरोप में दोनों के खिलाफ र्कावाई की मांग की है। इधर, पूर्व सरपंच शंकरीदेवी और पूर्व पंचायत समिति सदस्य जवाहर जाट ने बताया कि उन पर लगाए गए सारे आरोप झूठे व बेबुनियाद है। पंचायत ने उस वक्त एनओसी दी, मगर चरागाह जमीन होने से आवंटन निरस्त हो गया था। राजनीति द्वेषता से झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं, जो गलत है। मेरी छवि बिगाडऩे का प्रयास करने वाले लोगों के खिलाफ कोर्ट की शरण लूंगा।