रतलाम। ये सिर्फ पूर्व प्रधानमंत्री नहीं थे। ये नेता भी नहीं थे, ये तो मेरे लिए अब्बा जैसे थे। जब भी आते सबसे पहले परिवार के हाल जानते थे। कहते थे बेटियों को खुब पढ़ाना। जब उनको कचौरी खिलाता तो कहते, देख पंडित हूं, खुब खा जाउंगा, अब्दुल, फिर पंडित को बदनाम मत करना। ये कहना है रतलाम सर्किट हाउस के खानसामा अब्दुल का। अब्दुल उन कर्मचारियों में शामिल है, जिसने अटल जी की सेवा तब की, जब वे रतलाम आते थे।