
उज्जैन की एसडीआरएफ के डाइवर्स
रतलाम.झाली तालाब में बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात को कूदे रायसेन निवासी झूले के कर्मचारी सोनू पिता रंजनसिंह को तालाब में ढूंढने के लिए शनिवार को उज्जैन की एसडीआरएफ की टीम भी रतलाम पहुंची। टीम में डीप डाइविंग कर्मचारी भी थे। आक्सीजन सिलेंडर और मास्क पहनकर कर्मचारियों ने तालाब में 50 फीट की गहराई तक सर्चिंग की लेकिन सोनू को नहीं ढूंढा जा सका। शनिवार की शाम को अंधेरा होने के बाद दूसरे दिन का रेस्क्यू बंद करना पड़ा।
होमगार्ड के कंपनी कमांडर बद्री मंडलोई ने बताया रतलाम की एसडीआरएफ टीम के साथ ही उज्जैन के पांच लोगों की टीम को शनिवार को रतलाम बुलाया गया। टीम ने दोपहर बाद से अपना रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया किंतु शाम तक सोनू का पता नहीं चल पाया है। तालाब की गहराई ज्यादा और पानी साफ नहीं होने से डाइवर्स इससे नीचे खोजबीन नहीं कर सके।
दिनभर रहा लोगों का जमावड़ा
झाली तालाब में कूदे सोनू का शव ढूंढने के लिए एसडीआरएफ की टीमें लगी हुई है। इन्हें देखने के लिए सुबह से लेकर शाम तक तालाब किनारे लोगों का जमावड़ा लगा रहा। हर किसी को इस बात की आशा थी कि एसडीआरएफ की टीम उसे तालाब से बाहर निकाल लेगी। तालाब के चारों तरफ रैलिंग के बाहर से महिलाएं, पुरुष और युवा खड़े होकर देखते रहे। कोई आता रहा तो कोई काफी देर तक रुकने के बाद वापस रवाना होता गया। हर कोई चाह रहा था कि जल्द सोनू का पता चले, जिससे उसके परिवार को सौंप सके। खास बात यह है कि महिलाएं भी तालाब किनारे काफी संख्या में एसडीआरएफ की कार्रवाई देखने के लिए पहुंचती रही।
यह है घटनाक्रम
सोनू के बड़े भाई दानसिंह ने बताया कि सोनू करीब छह साल से उज्जैन वाले के झूले पर काम कर रहा है। पास के झूले के कर्मचारी रामा से उसकी दोस्ती थी। गुरुवार और शुक्रवार की दरमियानी रात करीब साढ़े 12 बजे रामा का फोन आया कि सोनू लापता हो गया। इस पर माता-पिता, मौसी सहित अन्य के साथ दानसिंह रतलाम पहुंचे तो पता चला कि वह झाली तालाब में कूदा था। किनारे पर ही उसका मोबाइल फोन, कपड़े, चप्पल, पर्स आदि थे। रामा ने यह नहीं बताया था कि सोनू तालाब में कूद गया है। एसडीआरएफ की टीम दिनभर से रस्सी से तालाब में सोनू को ढूंढने का काम कर रही है। हमने और वहां मौजूद लोगों ने उन्हें बताया भी कि तालाब बहुत गहरा है और छोटी सी रस्सी से कैसे तल तक ढूंढेंगे किंतु हमारी नहीं सुनी गई।
किनारे पर मां करती रही प्रार्थना
सोनू की मां सरजूबाई और पिता रंजनसिंह भी रतलाम आए हुए हैं। मां अपने बेटे के सही सलामत होने की प्रार्थना किनारे पर बैठकर करती रही। उन्होंने अगरबत्ती और फूल भी किनारे पर चढ़ाकर ईश्वर से प्रार्थना की। शाम तक उनके हाथ निराशा ही लगी। स्टेशन रोड थाने के सब इंस्पेक्टर युनूस खान ने बताया रात में भी पानी में एसडीआरएफ की टीम ने ढूंढा और शुक्रवार को दिनभर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। शनिवार को भी शाम को अंधेरा होने पर बंद कर दिया गया।
Updated on:
31 Oct 2026, 9:02 PM IST
Published on:
31 Oct 2026, 9:01 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.