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Premanand Ji Maharaj: नशा, डिप्रेशन और व्यभिचार रोकने का प्रेमानंद महाराज जी ने बताया उपाय, जानें क्या

Premanad Ji Maharaj Ke Pravachan: आजकल लोगों में चिंता, डिप्रेशन, नशा आम होता जा रहा है। ऐसा शायद ही कोई घर मिले, जहां ये समस्याएं न मिलें। अब प्रेमानंद जी महाराज ने इसका उपाय बताया है, जो वायरल हो रहा है, आइये पढ़ते हैं प्रेमानंद महाराज का डिप्रेशन रोकने का उपाय (Premanand Ji Maharaj Upay) ..
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भारत

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Pravin Pandey

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Updated: 20 Jun 2025, 5:11 PM IST

Premanand Ji maharaj upay to stop drug addiction

Premanand Ji maharaj upay to stop depression: प्रेमानंद महाराज का डिप्रेशन रोकने का उपाय (Patrika design)

Premanand Ji Maharaj Upay To Stop Drug Addiction: चिकित्सकों की मानें तो चिंता, डिप्रेशन, नशा जुड़े हुए हैं। अक्सर एक के कारण दूसरा और दूसरे के कारण तीसरा व्यक्ति को जकड़ता जाता है। अक्सर देखने में आता है कि किसी कारण से व्यक्ति की चिंता उसे डिप्रेशन में डाल देता है और उसके हल के लिए मनुष्य नशे का लती हो जाता है।

एकांतिक वार्तालाप में जब एक भक्त ने प्रेमानंद महाराज से पूछा कि आजकल नए बच्चों को विवाह से डर लग रहा है और नशे के कारण ही समाज दुराचार में उतर रहा है इसे कैसे रोकें तो प्रेमानंद महाराज ने जो उपाय बताया वो वायरल हो रहा है। आइये जानते हैं प्रेमानंद महाराज का डिप्रेशन और नशा रोकने का उपाय


ये है नशा और डिप्रेशन रोकने का उपाय (Premanand Ji Maharaj Upay To Stop Drug Addiction)


प्रवचन में प्रेमानंद महाराज ने कहा कि समाज में बढ़ते अधर्म, पाप नशा, पाप, डिप्रेशन, चिंता और व्यभिचार को रोकने का एक ही उपाय है, आध्यात्मिक मार्ग पर चलना। अध्यात्म के मार्ग से ही सुधार संभव है।

अध्यात्म से पाप कर्म के प्रति अवेयरनेस आ जाती है कि मैं ये पाप कर्म नहीं करूंगा, ये निंदनीय है। आज लाखों नौजवान नशा, मांसाहार छोड़ रहे हैं, ये अध्यात्म के जरिये ही संभव है।

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किसी व्यक्ति ने धर्म को जाना नहीं, शास्त्र पढ़ा नहीं, सत्संग किया नहीं तो मनमाना आचरण करेगा। क्योंकि आजकल व्यक्ति गंदा जीवन जीने को श्रेष्ठ कार्य समझने लगा है। इससे हानि हो रही है। ये लोग अध्यात्म के करीब आएंगे तो इससे पीछा छुड़ा लेंगे।


ऐसे छूटेंगी आदतें

अध्यात्म के बिना इन बुराइयों का कोई समाधान नहीं है। जब तक व्यक्ति धर्म से नहीं जुड़ेगा, अध्यात्म से नहीं जुड़ेगा, भगवान से नहीं जुड़ेगा, संतों से नहीं जुड़ेगा तो उसकी बुद्धि और धर्म के ज्ञान के बिना इंद्रियां पवित्र नहीं होगी तो उसमें सुधार नहीं होगा। धर्म का आचरण नहीं होगा तो उसकी गंदी आदतें नहीं छूटेंगी।