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संभल हिंसा: कोर्ट में पेश नहीं हुआ मुल्ला अफरोज, 9 अक्टूबर को आखिरी मौका; नहीं आया तो NBW होगा जारी

Sambhal News: संभल हिंसा मामले में आरोपी मुल्ला अफरोज 5 अक्टूबर को जिला अदालत में पेश नहीं हुआ। वकील ने तबीयत खराब होने का हवाला देते हुए स्थगन प्रार्थना पत्र दिया। कोर्ट ने अब 9 अक्टूबर की तारीख तय करते हुए अंतिम मौका दिया है।
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सम्भल

•

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Mohd Danish

•

Oct 05, 2026

mulla afroz sambhal violence court hearing nbw 9 october

संभल हिंसा: कोर्ट में पेश नहीं हुआ मुल्ला अफरोज..

Sambhal Violence News: संभल हिंसा मामले में आरोपी मुल्ला अफरोज सोमवार को जिला न्यायालय में होने वाली पेशी पर नहीं पहुंचा। उसके अधिवक्ता आसिफ अख्तर की ओर से अदालत में तबीयत खराब होने का हवाला देते हुए स्थगन प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया। मामले की सुनवाई जिला न्यायाधीश डॉ. विदुषी सिंह की अदालत में चल रही है।

9 अक्टूबर की तारीख तय

अदालत ने मामले में अब अगली सुनवाई के लिए 9 अक्टूबर की तारीख तय की है। न्यायालय की ओर से मुल्ला अफरोज को पेश होने का अंतिम अवसर दिया गया है। अगर वह अगली तारीख पर भी अदालत में पेश नहीं होता है, तो उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट यानी NBW जारी किया जा सकता है।

पहले भी मांगा गया था स्थगन

जिला शासकीय अधिवक्ता राहुल दीक्षित ने सोमवार दोपहर करीब 1 बजे बताया कि इससे पहले 1 अक्टूबर को भी मुल्ला अफरोज की ओर से स्थगन प्रार्थना पत्र दिया गया था। उस समय आपत्ति के बाद अदालत ने अंतिम अवसर देते हुए 5 अक्टूबर की तारीख सुनवाई के लिए निर्धारित की थी, लेकिन इस तारीख पर भी आरोपी अदालत में उपस्थित नहीं हुआ।

बिलाल हत्याकांड से जुड़ी सुनवाई

सरकारी वकील के अनुसार, अदालत में बिलाल हत्याकांड से जुड़े मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 351 के तहत कार्रवाई की सुनवाई होनी है। इस मामले में मुल्ला अफरोज और गुलाम आरोपी हैं। दोनों के खिलाफ न्यायालय में चल रही कार्यवाही में साक्ष्यों से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर सुनवाई होनी है।

वकील ने दी तबीयत खराब होने की जानकारी

मुल्ला अफरोज के अधिवक्ता आसिफ अख्तर ने अदालत में उसकी तबीयत खराब होने का प्रार्थना पत्र दिया। इसके जरिए सुनवाई को आगे बढ़ाने का अनुरोध किया गया। हालांकि, अदालत ने मामले की सुनवाई को टालते हुए अब 9 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की है और अगली पेशी को लेकर सख्त रुख अपनाया है।

सरकारी पक्ष ने जताई आपत्ति

जिला शासकीय अधिवक्ता राहुल दीक्षित ने कहा कि आरोपी पक्ष की ओर से पहले भी स्थगन प्रार्थना पत्र दिए जाते रहे हैं। सरकारी पक्ष का कहना है कि मामले की कार्यवाही को लंबे समय तक टालने के बजाय इसे जल्द पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि अगली सुनवाई में स्थगन की स्थिति आने पर अदालत से लगातार सुनवाई की मांग की जाएगी।

डे-बाय-डे सुनवाई की मांग

सरकारी वकील राहुल दीक्षित के मुताबिक, अगर अगली तारीख पर भी स्थगन प्रार्थना पत्र दिया जाता है तो सरकारी पक्ष अदालत से डे-बाय-डे सुनवाई की मांग करेगा। उनका कहना है कि इस मामले की पत्रावली में साक्ष्य संबंधी कार्यवाही जल्द से जल्द पूरी कराई जानी चाहिए, ताकि मुकदमे को आगे बढ़ाया जा सके।

NSA रद्द होने पर सरकारी पक्ष का बयान

राहुल दीक्षित ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश सभी के लिए सर्वमान्य है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुल्ला अफरोज के खिलाफ चल रही अन्य कानूनी कार्यवाही अपने स्थान पर है। सरकारी पक्ष के अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी NSA रद्द होने का मतलब यह नहीं है कि आरोपी के खिलाफ बाकी मामलों में कार्रवाई समाप्त हो गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने NSA किया था रद्द

मुल्ला अफरोज को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 29 सितंबर को उसकी याचिका पर फैसला सुनाया था। अदालत ने उस पर लगाए गए NSA को रद्द कर दिया था और उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि निर्धारित अवधि के भीतर याचिकाकर्ता को मुआवजे की रकम दी जाए।

अन्य आपराधिक मामला होने पर रिहाई का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि यदि मुल्ला अफरोज के खिलाफ कोई अन्य आपराधिक मामला नहीं है, तो उसे रिहा किया जाए। इसी फैसले के बाद जिला न्यायाधीश डॉ. विदुषी सिंह की अदालत में उसकी यह पहली पेशी बताई जा रही है। हालांकि, मौजूदा मामले में उसकी अदालत में उपस्थिति नहीं हो सकी।

संभल हिंसा के बाद दर्ज हुए थे मुकदमे

संभल में 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हिंसा भड़क गई थी। इससे पहले 19 नवंबर 2024 को हिंदू पक्ष की ओर से चंदौसी की सिविल सीनियर डिवीजन अदालत में शाही जामा मस्जिद को श्रीहरिहर मंदिर होने का दावा करते हुए याचिका दाखिल की गई थी। अदालत के आदेश पर उसी दिन सर्वे का पहला चरण हुआ था।

दूसरे सर्वे के दौरान भड़की हिंसा

24 नवंबर 2024 को सर्वे का दूसरा चरण शुरू हुआ। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए और स्थिति बिगड़ गई। पुलिस पर पथराव और फायरिंग की घटनाएं हुईं। हिंसा में पांच लोगों की मौत हुई थी, जबकि एसपी कृष्ण बिश्नोई, एएसपी अनुज चौधरी, डिप्टी कलेक्टर समेत 29 पुलिसकर्मी घायल हुए थे।

हजारों लोगों पर दर्ज हुआ मुकदमा

हिंसा के बाद संभल कोतवाली और नखासा थाने में कुल 12 एफआईआर दर्ज की गई थीं। इन मामलों में सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क और सपा विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल समेत कई लोगों को नामजद किया गया था। पुलिस की कार्रवाई में 2750 से अधिक लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए।

चार्जशीट में बदला गया नाम

मामले की जांच और साक्ष्यों के आधार पर चार्जशीट दाखिल होने के दौरान सपा विधायक के बेटे सुहैल इकबाल का नाम निकाल दिया गया था। वहीं, हिंसा से जुड़े मामलों में बड़ी संख्या में आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ी।

158 अभियुक्त भेजे गए जेल

जामा मस्जिद के सदर जफर अली एडवोकेट सहित कुल 158 अभियुक्तों को जेल भेजे जाने की जानकारी सामने आई थी। इनमें तीन महिलाएं भी शामिल थीं। पुलिस और जांच एजेंसियों के अनुसार, फरार गैंगस्टर शारिक साठा से जुड़े लोगों के नाम भी इस मामले में सामने आए थे।

मुल्ला अफरोज पर NSA की कार्रवाई

संभल हिंसा के मुख्य साजिशकर्ता बताए गए फरार गैंगस्टर शारिक साठा के तीन गुर्गों के तौर पर मुल्ला अफरोज, वारिस और गुलाम के नाम सामने आए। मुल्ला अफरोज पर अक्टूबर 2025 में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी NSA के तहत कार्रवाई की गई थी। इसके बाद वारिस और गुलाम पर भी NSA की कार्रवाई की गई।

शारिक साठा के खिलाफ लुकआउट नोटिस

फरार गैंगस्टर शारिक साठा को लेकर भी कार्रवाई जारी है। उसके खिलाफ रेड कॉर्नर लुकआउट नोटिस जारी किया जा चुका है। पुलिस और जांच एजेंसियां हिंसा से जुड़े मामलों में फरार आरोपियों की तलाश और कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ा रही हैं।

जफर अली को मिल चुकी है जमानत

संभल हिंसा मामले में जामा मस्जिद के सदर जफर अली को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद 1 अगस्त 2025 को मुरादाबाद जेल से रिहा किया गया था। उन्हें 24 मार्च को जेल भेजा गया था और करीब 131 दिन बाद जेल से बाहर आए थे। इसके अलावा हिंसा से जुड़े कई अन्य आरोपियों को भी इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है।

अब 9 अक्टूबर पर नजर

फिलहाल मुल्ला अफरोज की अगली पेशी 9 अक्टूबर को तय है। अदालत ने इसे अंतिम अवसर बताया है। ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि आरोपी अगली तारीख पर अदालत में पेश होता है या नहीं। अगर वह फिर गैरहाजिर रहता है, तो अदालत की ओर से गैर-जमानती वारंट जारी किए जाने की संभावना है।