8 नवंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

FACT CHECK : इस राज्य में किराए पर मिलती है बीवियां, 10 रुपए के स्टांप पर तय होता है सौदा

FACT CHECK : एक गांव ऐसा है जहां से कोई भी शख्स अपने लिए किराए पर बीवी ला सकता है। जानिए क्या है 'धड़ीचा प्रथा'।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

शिवपुरी

•

image

Mohammad Faiz Mubarak

•

Updated: 10 Feb 2022, 12:10 PM IST

patni.jpg

,,

शिवपुरी. देश में कई जगहें ऐसी हैं, जहां महिलाओं को कुप्रथाओं का दंश झेलना पड़ता है। कुछ प्रथाएं तो ऐसी हैं, जिनके बारे में सुनकर हर कोई हैरत में पड़ सकता है। आज हम आपको मध्य प्रदेश के एक गांव की एक कुप्रथा के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में सुनकर आप दंग रह जाएंगे। यहां बकायदा स्टांप पेपर पर लड़कियां किराए पर ले जाते थे। यह प्रथा अब कई सामाजिक संगठन और सरकार के प्रयास से बंद हो गई है।

पत्रिका के फैक्ट चैक में पता चला है कि यह प्रथा कई वर्षों तक थी, अब इस प्रकार के मामले नहीं आते हैं...।

हम बात कर रहे हैं मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के एक गांव की, जहां से कोई भी शख्स अपने लिए किराए पर बीवी मिलती थी। इस प्रथा का नाम 'धड़ीचा' है। प्रथा के तहत, देश का कोई भी अमीर शख्स इस गांव की लड़कियों को बतौर बीवी किराए पर ले सकते थे, लेकिन ये बंधन जिंदगीभर का नहीं होता। ये सौदा महीने या साल के हिसाब से होता था।

यह भी पढ़ें- महिला को छेड़ा तो परिजन ने मनचले के कपड़े फाड़कर निकाला जुलूस, जमकर की पिटाई, वीडियो वायरल


एग्रीमेंट खत्म होने पर पुरुष तय करता है ये बात

प्रथा के तहत किराए पर पत्नी लेने के लिए यहां पुरूष और लड़की के घरवालों में पहले एक रकम तय की जाती थी, जो 500 से 50 हजार रुपए तक हो सकती है। यहां किराए पर बीवी लेने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं और जिसे जितने समय के लिए लड़की चाहिए, वो उसे ले जा सकता है। 10 रूपए के स्टांप पेपर पर शर्ते लिखकर दोनों पक्ष हस्ताक्षर करते थे। सौदा तय होने के बाद उस महिला को तय वक्त तक बीवियों वाली सारी जिम्मेदारियां निभानी होती थी। एग्रीमेंट खत्म होने पर ये पुरूष पर निर्भर करता है कि, वो आगे नया एग्रीमेंट करके उसी महिला के साथ रहना चाहता है या फिर दूसरी बीवी किराए पर लेता है।

यह भी पढ़ें- प्लेन क्रैश में सरकार ने पायलट को माना कसूरवार, थमा दिया 85 करोड़ की वसूली नोटिस


दूसरे राज्यों में भी थी यह प्रथा

आपको बता दें कि, इस प्रथा का चलन सिर्फ मध्य प्रदेश के शिवपुरी में ही नहीं, बल्कि गुजरात के भी कुछ गांव ऐसे हैं, जहां 'धड़ीचा प्रथा' थी। हैरानी की बात है कि किराए पर बीवी की कुप्रथा कई दशकों से लगातार ऐसे ही चली थी। लेकिन, कई सामाजिक संगठनों के आवाज उठाने पर यह प्रथा-धीरे-धीरे बंद हो गई।

फैक्ट चैकः

फैक्ट चैक में यह पता चला है कि यह कुप्रथा कई वर्षों पहले तक होती थी, जिसमें स्टांप पैपर पर बकायदा एग्रीमेंट होता था। क्योंकि जब एग्रीमेंट होता था तो पुलिस को भनक लग जाती थी और दोनों पक्षों को गिरफ्तार कर लिया जाता था। इसलिए एग्रीमेंट करके लड़कियों को किराए पर लेने की प्रथा बंद हो गई। सूत्रों के मुताबिक यह प्रथा दबे-छुपे भी होने की संभावना है। फिर भी पुलिस इस प्रकार के लोगों पर निगरानी रखती है।