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पत्रिका पड़ताल : शेखावाटी में सरकार की चुनावी साल की ये घोषणाएं हुई हवा-हवाई

सीकर. सरकारों की चुनावी साल की ज्यादातर घोषणा हवा-हवाई हुई है। इसकी हकीकत पिछले दस वर्ष में हुई चुनावी घोषणाओं से सामने आ रही है।

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Nawalgarh pulia sikar

सीकर. सरकारों की चुनावी साल की ज्यादातर घोषणा हवा-हवाई हुई है। इसकी हकीकत पिछले दस वर्ष में हुई चुनावी घोषणाओं से सामने आ रही है। इसके पीछे मुख्य वजह आचार संहिता व बजट सहित अन्य दिक्कत रही है। शेखावाटी में खेल स्कूल, मेडिकल कॉलेज, कुम्भाराम लिफ्ट परियोजना, खेल एकेडमी, मिनी सचिवालय व नवलगढ़ पुलिया फोरलेन सहित कई प्रोजेक्ट इसके बड़े उदाहरण भी है। जिम्मेदारी जनप्रतिनिधि भी अधूरे प्रोजेक्टों पर आखिरी साल में इसलिए दांव लगाते है ताकि जनता को फिर से उम्मीद बंधा सके। पिछले दस साल में चुनावी साल की घोषणाओं से रूबरू कराती रिपोर्ट।


शेखावाटी विवि: पिछली सरकार ने घोषणा की, अब तक नहीं बना


पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय की घोषणा पिछले दस वर्ष तक उलझी रही। पिछली सरकार ने भी आखिरी साल में विवि की घोषणा की। लेकिन बजट सहित अन्य पेंचों के कारण विवि अटक गया। भाजपा सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए बजट दिया, लेकिन चुनावी साल की घोषणा होने के कारण प्रोजेक्ट अब तक धरातल पर नहीं आ सका है।


अब चुनावी साल में फिर यह प्रोजेक्ट नवलगढ़ पुलिया फोरलेन


भाजपा सरकार ने इस साल बजट सत्र में नवलगढ़ पुलिया फोरलेन की घोषणा की है। लेकिन अभी तक इस प्रोजेक्ट की डीपीआर भी नहीं बनी है। यदि अप्रेल तक पुलिया की डीपीआर बनती भी है तो फिर राह में बजट सहित अन्य तकनीकी रोडे है।

मिनी सचिवालय


सांवली रोड पर बनने वाला मिनी सचिवालय प्रोजेक्ट भी वर्षो से अटका हुआ है। पिछली कांग्रेस सरकार ने मिनी सचिवालय की घोषणा की थी। लेकिन बजट नहीं मिलने के कारण काम नहीं
हो सका।

प्याज मंडी: बजट तक स्वीकृत नहीं हुआ, अब धरातल पर


दस साल पहले भाजपा सरकार ने ही रसीदपुरा में प्याज मंडी बनाने की घोषणा की थी। यह प्रोजेक्ट भी चुनावी साल में उलझ गया। बाद में सत्ता परिवर्तन के बाद कांग्रेस ने इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की कोशिश की लेकिन वह भी आखिरी सालों में है। फिर प्रदेश में भाजपा की सरकार आई तो यह प्रोजेक्ट आगे बढऩे लगा। आखिर में अब दस साल बाद यह प्रोजेक्ट किसानों के अरमानों पर खरा उतरेगा।

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खेल एकेडमी

भाजपा राज में खेल व कोठ्यारी स्कूल सहित अन्य प्रोजेक्ट भी शुरू हुए। लेकिन बजट की कमी के कारण यह प्रोजेक्ट कुछ साल ही चल सके। सत्ता परिवर्तन के बाद सरकार ने पूरी तरह इस प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया। अब हालत यह है कि पिछली कांग्रे सरकार की खेल एकेडमी के लिए भाजपा राज में बजट ही नहीं मिला।

इसलिए अटक जाते है प्रोजेक्ट

सेवाविृत्त अधिशाषी अभियंता बीएल सोनी का कहना है कि सरकार अक्सर चुनावी साल में काफी प्रोजेक्टों की घोषणा कर देती है। किसी भी प्रोजेक्ट को शुरू होने से तकनीकी तैयारी के लिए दो से तीन महीने का समय चाहिए होता है। इसके बाद उसकी वित्तिय स्वीकृति जारी होती है। इस बीच आचार संहिता लगने के कारण यह प्रोजेक्ट अटक जाते है। यदि सरकार इन प्रोजेक्टों को समय रहते हुए मंजूरी मिले तो यह जनता की राह आसान कर सकते है।

कुम्भाराम लिफ्ट परियोजना

पिछली कांग्रेस सरकार ने शेखावाटी में पेयजल समस्या को दूर करने के लिए कुम्भाराम लिफ्ट पेयजल परियोजना की घोषणा की। इसके बाद झुंझुनूं जिले के चार ब्लॉक में तो काम शुरू हो गया। लेकिन सीकर जिले की डीपीआर बनती इससे पहले ही आचार संहिता लग गई। फिर यह प्रोजेक्ट सियासत में भी उलझा। इसके बाद भाजपा सरकार में विधायक तीन साल तक प्रोजेक्ट को मंजूरी देने की मांग करते रहे। लेकिन चुनावी साल तक महज सरकार डीपीआर ही बनवा सकी।

यूआईटी: तक नहीं बना


पिछली कांगे्रस सरकार ने शहर के विकास को गति देने के लिए यूआईटी की घोषणा की। भाजपा सरकार पांच साल में यूआईटी का कार्यालय भी नहीं बनवा सकी है। चुनावी साल में यूआईटी को पटरी पर लाने की जल्दबाजी में अधिकारी बिना भूमि रूपान्तरण के कॉलोनी के आवेदन ले गए। यह प्रोजेक्ट अब तक धरातल पर नहीं आ सका।