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Tokyo Olympics 2020: बॉक्सर कार्लो पालम कभी सड़क से कचरा उठाने का काम करते थे, अब बने ओलंपिक मेडलिस्ट

Tokyo Olympics 2020: कार्लो पालम ने टोक्‍यो ओलंपिक में फ्लाईवेट का सिल्‍वर मेडल अपने नाम किया। भारत के मुक्केबाज अमित पंघाल ने ओलंपिक क्‍वालिफायर में कार्लो को हराकर ही टोक्‍यो ओलंपिक का टिकट हासिल किया था।
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नई दिल्ली

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Mahendra Yadav

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Updated: 7 Aug 2021, 3:17 PM IST

carlo paalam

carlo paalam

Tokyo Olympics 2020: खेलों के महाकुंभ टोक्यो ओलंपिक में कई खिलाड़ियों ने वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए और मेडल भी जीते। वहीं कुछ खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से अन्य एथलीट्स को प्रेरित किया। हालांकि ओलंपिक में मेडल जीतना सम्मान की बात होती है। ओलंपिक में पहुंचने के लिए खिलाड़ी कई वर्षों तक कड़ी मेहनत करते हैं। ओलंपिक में पहुंचकर मेडल जीतना किसी सपने से कम नहीं है। कई खिलाड़ी तो ऐसे होते हैं, जो अपने जीवन में आर्थिक तंगी और अन्य समस्याओं का सामना करते हुए ओलंपिक में पहुंचकर मेडल जीतते हैं। ऐसा ही एक उदाहरण टोक्यो ओलंपिक 2020 में भी देखने को मिला। दरअसल, फिलीपींस की सड़कों पर कचरा उठाने वाले कार्लों पालम ओलंपिक मेडलिस्ट बन गए हैं।

मुक्केबाजी में जीता सिल्वर मेडल
फिलीपीसं के कार्लो पालम ने टोक्‍यो ओलंपिक में फ्लाईवेट का सिल्‍वर मेडल अपने नाम किया। भारत के मुक्केबाज अमित पंघाल ने ओलंपिक क्‍वालिफायर में कार्लो को हराकर ही टोक्‍यो ओलंपिक का टिकट हासिल किया था। हालांकि अमित ने टोक्यो ओलंपिक में निराश किया।

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कूड़ा कचरा उठाते थे कार्लो
कार्लो को टोक्यो ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीतना अभी भी किसी सपने जैसा ही लग रहा है। एक वक्त कार्लो फिलीपींस की सड़कों से कूड़ा कचरा उठाने का काम करते थे। 16 जुलाई,1998 को बुकिडोंन में जन्‍में कार्लो जब 6 साल के थे तो उनकी मां उन्हें छोड़कर चली गई थीं। इसके बाद कार्लो के पिता अच्‍छे मौके की तलाश के लिए उन्‍हें लेकर कागायन डी ओरोस शहर आ गए। यहां कार्लो कचरा उठाने का काम करने लगे।

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चावल खरीदने के लिए की बॉक्सिंग
कार्लो के पड़ोसियों ने उन्हें बॉक्सिंग के लोकल टूर्नामेंट में हिस्‍सा लेने के लिए प्रोत्‍साहित किया। कार्लो ने 7 साल की उम्र में मुक्केबाजी का पहला मुकाबला जीता। इसके बाद कार्लो के लिए मुक्केबाजी चावल खरीदने का एक जरिया बन गया। बॉक्सिंग मैच जीतने से उन्हें जो पैसे मिलते, उससे वह परिवार के लिए चावल खरीदते। वर्ष 2009 में पार्क टूर्नामेंट में बॉक्सिंग के दौरान स्‍थानीय अधिकारियों की नजर कार्लो पर पड़ी और उन्‍हें कागायन डी ओरोस बॉक्सिंग ट्रेनिंग प्रोग्राम में शामिल किया गया। इसके बाद वर्ष 2013 में कार्लो को फिलीपींस की नेशनल टीम में शामिल किया गया। इसके बाद उनका इंटरनेशनल कॅरियर शुरू हुआ।