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श्रीगंगानगर.
दीपावली का त्योहार नजदीक है और रोशन करने के लिए दीयो का निर्माण शुरू हो गया है लेकिन इस बार दीयो पर भी महंगाई की मार देखी जा रही है।महंगाई के चलते बनाने वालों ने दीयो का आकार छोटा कर दिया है। जिससे उनमें डाले जाने वाले तेल की खपत कम की जा सके और दीयो की बिक्री भी अधिक हो सके।
कुछ साल पहले तक दीपावली पर बनाए जाने वाले दीयो का आकार इतना बड़ा होता था कि उनमें चार-पांच छोटी चम्मच तेल डालना पड़ता था।धीरे-धीरे इन दीयो का आकार कम होता गया और अब की बार तो दीयो का आकार इतना छोटा हो गया है कि एक चम्मच तेल डालने पर ही जल सकते हैं। दीये बनाने वालों का कहना है कि दीयो पर भी अब महंगाई की मार पड़ रही है। इसके चलते अब छोटे से छोटा दीया बनाया जा रहा है। जिसमें तेल की खपत कम हो। दीये बनाने वाले मणीराम प्रजापत व अन्य का कहना है कि बड़े दीये में कम तेल डालने पर बाती पूरी तरह जलती भी नहीं है। वहीं दीया छोटा होने के कारण बाती पूरी तरह जल जाती है। महंगाई के चलते लोग ज्यादातर छोटे दीये ही खरीदना पसंद करते हैं, जिससे उनमें कम तेल डालने पड़े और वह पूरा जले भी। इन दिनों दीये की कीमत बीस रुपए में एक दर्जन दीये मिल रहे हैं।
अब चाक घुमाने की नहीं रही ताकत
- दीये बनाने वालों का कहना है कि हमारे माता-पिता पहले चाक को हाथ घुमाकर मिट्टी के बर्तन आदि बनाते थे लेकिन आज की पीढ़ी में चाक को घुमाने की ताकत नहीं बची है। इसलिए मोटर से चलने वाले चाक का ही इस्तेमाल किया जाता है। मोटर से चाक चलाकर अधिक बर्तन बनाए जा सकते हैं।
कम हो रही है मिट्टी के बर्तन बनाने वालों की संख्या
- पिछले करीब एक दशक के दौरान जिले में मिट्टी के बर्तन बनाने वालों की कमी होती जा रही है। बर्तन बनाने वालों का कहना है कि पहले पीढ़ी दर पीढ़ी यही कार्य करते थे लेकिन अब लोग पढ़ लिखकर अन्य व्यवसाय करने लगे हैं। इससे बर्तन बनाने वालों की कमी होती जा रही है। इसके चलते ही चाइनीज बर्तनों का उनके धंधे पर कोई खास असर नहीं पड़ता है। बनाने वालों की कमी होने से मिट्टी के बर्तनों की मांग बनी रहती है।
Updated on:
2 Oct 2017, 8:41 PM IST
Published on:
2 Oct 2017, 8:33 PM IST
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