
देवली स्थित तहसील कार्यालय परिसर स्थित तहसील राजस्व लेखाकार का बंद कार्यालय।
देवली. देवली पटवार मण्डल में पटवारियों सहित राजस्वकर्मियों का टोटा मौजूदा कर्मचारियों के लिए सिरदर्द बना हुआ है। वर्तमान में स्वीकृत पदों के मुकाबले महज एक तिहाई ही पटवारी कार्यरत हैं। लिहाजा मौजूदा राजस्व कर्मचारियों पर काम का अतिरिक्त भार है। वहीं कर्मचारियों की संख्या कम होने से विभिन्न कामकाम बाधित हो रहे हैं।
गौरतलब है कि तहसील में 25 पटवार मण्डल है। जहां प्रत्येक मण्डल के अनुसार एक-एक पटवारी होना आवश्यक है। वहीं दो पटवारी एलआरसी (लैण्ड रिकॉर्ड व कम्प्यूटराइजेशन) में 2 पटवारी व 3 पटवारी लीव रिजर्व के तहत होना जरूरी है। ताकि राजस्व कार्य नियमित व सुचारू चल सके, लेकिन स्थिति इसके विपरित है।
पटवारियों के स्थानान्तरण व सेवानिवृत्ति से इनके पद कम होते चले गए। यहां एक पटवारी पर करीब तीन से अधिक पटवार मण्डलों का भार है। वर्तमान में महज 9 पटवारी ही कार्यरत हैं। जबकि मण्डल के अनुसार 25 पटवारी होना आवश्यक है। ऐसे में पटवारियों के पास काम के पहाड़ खड़े हैं।
वहीं सरकार की विभिन्न योजनाओं के लक्ष्य इनके लिए सिरदर्द बने हुए हंै। हालत यह है कि ग्रामीणों के काम न सरकार की योजनाओं की सफलतम क्रियान्विति हो रही है।
ताला नहीं खुला
तहसील में राजस्व कर्मचारियों की कमी का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि तहसील राजस्व लेखाकार कार्यालय काफी समय से बंद पड़ा है। ऐसे में राजस्व रिकॉर्ड समय पर संधारित नहीं हो रहा। नायब तहसीलदार नासिरदा का पद भी रिक्त है।
इसका चार्ज देवली नायब तहसीलदार भंवरलाल मीणा को दिया हुआ है। देवली नायब तहसीलदार कार्यालय से समय निकालकर उपतहसील नासिरदा का कामकाज निपटा रहे हैं। इसके अलावा एलआरसी में तीन पटवारियों के पद रिक्त होने से लैण्ड रिकॉर्ड में मौजूदा कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इन पर पड़ रहा है प्रभाव
पटवारी समेत राजस्वकर्मियों की कमी का सबसे अधिक खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रह है। एक-एक पटवारी को तीन-तीन मण्डलों का काम सम्भालना पड़ रहा है। ऐसे में पांच दिन को तीन मण्डलों में विभाजित करना पटवारियों के टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। वहीं ग्रामीणों को यह पता नहीं लग पाता है, कि किस दिन पटवारी कौनसेे क्षेत्र का कार्य करेंगे।
पटवारियों की कमी का असर नक्शा टे्रस, जमाबंदी, नकल, नामान्तकरण आदि कार्यों पर पड़ रहा है। वहीं सरकार की डीआईएल आरएमपी (डिजीटल इंडिया लैण्ड रिकार्ड मॉर्डनाइजेशन प्रोग्राम) पर पड़ रहा है। इसके तहत पटवारी जमाबंदी का विभाजन कर रहे हंै। वहीं नक्शा तरमीम के कार्य भी बाधित हो रहे हंै, लेकिन विभागीय अधिकारियों का इस ओर ध्यान नहीं है।
किराए के कमरों में चल रहा है काम
पटवारियों की कमी के साथ-साथ पटवार भवनों का भी अभाव है। 25 मण्डलों में महज 5 स्थानों पर ही पटवार भवन बने हैं। जहां बैठकर पटवारी कामकाज कर रहे हैं। जबकि शेष 20 मण्डलों से सम्बधित कामकाज निजी स्थानों पर अथवा घरों पर किए जा रहे हैं। ऐसे में पटवारियों को गांवों में कमरे किराए पर लेकर पटवार भवन संचालित करने पड़ रहे हंै।
Published on:
31 Dec 2017, 7:23 AM IST
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