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मंत्री के गृह क्षेत्र में सर्दी में भी नही मिल रहा पानी, आठ दिन से आपूर्ति है ठप

जल संकट से परेशान ग्रामीणों ने पंचायत भवन पहुंच कर पानी की मांग करने के साथ व्यवस्था में सुधार नहीं होने पर आन्दोलन की चेतावनी दी।  
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टोंक

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Pawan Kumar Sharma

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Updated: 25 Dec 2017, 8:00 AM IST

फिल्टर प्लांट व पानी की टंकी

आवां में खाली पड़ी पानी की टंकी, आवां में बनाया गया फिल्टर प्लांट व पानी की टंकी।

आवां. जलदाय विभाग की अनदेखी व ट्यूबवैलों का पानी सूख जाने से कस्बे की पेयजल व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। सर्दी के इस मौसम में आठ दिन में भी पानी नहीं मिलने से लोगों में खासी नाराजगी है। जल संकट से परेशान ग्रामीणों ने पंचायत भवन पहुंच कर पानी की मांग करने के साथ व्यवस्था में सुधार नहीं होने पर आन्दोलन की चेतावनी दी।

इस दौरान सरपंच राधेश्याम चन्देल के समझाने व विभाग के अभियंताओं को समस्या से अवगत कराने के बाद मामला शान्त हुआ। आवां निवासी कृष्ण गोपाल जांगिड़, रतन लाल जैन, बद्री लाल चन्देल, रंगलाल माली, कौशल जैन, महेन्द्र माहुर, जम्बू कुमार जैन, बरदी लाल आदि ने बताया कि गत चार माह से पानी की समस्या दिन-प्रतिदिन विकराल होती जा रही है।

कस्बे को बनास का पानी उपलब्ध कराने के लिए बन्थली से बिछाई गई लाखों की पाइप लाइन शो-पीस बनकर रह गई है। विभागीय अनदेखी से ये पानी लम्बे अर्से से आवां तक नहीं पंहुच पा रहा है। ट्यूबवैल का पानी भी टूटने से लोग महंगे भाव के टैंकर खरीदने को मजबूर हैं।

दु:खद पहलू यह भी है कि गुलाबपुरा रोड पर बनाए जा रहे पम्प हाउस व फिल्टर प्लांट का काम लगभग पूर्ण होने के बावजूद बीसलपुर परियोजना का पानी नसीब नहीं हो पा रहा है। इससे बारहपुरों सहित पूरा क्षेत्र पानी से महरूम है। इधर, आवां स्थित विभाग के कार्मिकों का कहना है कि तीन में से एक ट्यूबवैल नाकारा हो गई है, शेष दो से भी पानी कम मिलने लगा है।

निराश लौटना पड़ा

दूनी. कृषि मण्डी में खोले गए खरीद केन्द्र में गुरुवार बारदाना खत्म हो जाने से किसानों को निराश लौटना पड़ा। खरीद केन्द्र पर तीसरी बार बारदाना समाप्त होने से किसान परेशान हुए हैं। किसानों ने बताया कि खरीद केन्द्र पर उड़द तुलवाने की सूचना उनको मोबाइल फोन पर आए संदेश मिली थी।

इससे करीब एक दर्जन किसान उड़द लेकर आए, लेकिन बारदाना नहीं होने से निराश लौटना पड़ा। खरीद केन्द्र पर मवेशियों व अन्य से जिन्स की सुरक्षा किसान को ही करनी पड़ रही है।