
मनमर्जी से झील में बना रहे थे सडक़, अब हाइकोर्ट को दो जवाब
मोहम्मद इलियास/उदयपुर
राजस्थान हाईकोर्ट ने उदयपुर शहर में झीलों के संरक्षण को लेकर पूर्व में जारी आदेशों की पालना सुनिश्चित नहीं होने एवं चांदपोल से ब्रह्मपोल तक वैकल्पिक सडक़ के प्रस्ताव सहित पारिस्थितिकी को प्रभावित करने वाली प्रस्तावित योजनाओं को लेकर अब उदयपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड से भी जवाब मांगा हैं। इससे पूर्व नगर निगम और नगर विकास न्यास को नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत महांति व न्यायाधीश विनित कुमार माथुर की खंडपीठ में नगर निगम के अधिवक्ता ने कहा कि स्मार्ट सिटी मिशन के तहत चांदपोल से ब्रह्मपोल तक वैकल्पिक सडक़ का प्रस्ताव लिया गया है। इस पर खंडपीठ ने कंपनी को जरूरी पक्षकार मानते हुए नोटिस जारी किए हैं। गौरतलब है कि स्मार्ट सिटी ने यहंा पर वैकल्पिक सडक़ के लिए तीन बाद टेंडर भी किए लेकिन कोई ठेकेेदार नहीं आया। हाईकोर्ट ने उदयपुर शहर में झीलों की बदहाल स्थिति को देखते हुए वर्ष 2014 में स्वप्रसंज्ञान के आधार पर जनहित याचिका दर्ज की थी। याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दो न्याय मित्र नियुक्त किए, जिन्होंने समय-समय पर झीलों का निरीक्षण कर कोर्ट के सम्मुख वस्तुस्थिति रिपोर्ट पेश की। कोर्ट ने 2018 में जनहित याचिका निस्तारित करते हुए उदयपुर जिला कलक्टर की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित करने के आदेश दिए थे, जिसे हर तीन महीने में एक बार बैठक आयोजित कर झीलों के संरक्षण के लिए कदम उठाने थे।
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यहां नाले पर बना दी दुकान, सोते रहे जिम्मेदार
बेकनी पुलिया अतिक्रमण हटाने के बाद निगम को अब बैंक तिराहे पर श्रमजीवी कॉलेज के सामने एक दुकान पूरी नाले पर बनी मिली। नाले की सफाई के दौरान वहां पर एक बार काम रोक दिया गया। निगम अधिकारियों ने बताया कि बैंक तिराहे से बापू बाजार जाने वाले मार्ग पर कॉर्नर पर वहांं पर कुछ दुकानें नाले पर बनी मिली। एक दुकान तो पूरी नाले ही होना सामने आया। दुकान मालिक पूछताछ में एक बार कोई जवाब नहींं दे पाया। यहां पर नाले पर भी पानी के बहाव क्षेत्र में निर्माण किया गया है।
Updated on:
12 Aug 2021 11:41 am
Published on:
12 Aug 2021 11:41 am
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