
Shivpal
वाराणसी.अखिलेश यादव शिवपाल सिंह यादव के करीबियों को गले लगाने को तैयार हैं। पर सियासी शुद्धीकरण के साथ। उन्होंने पूर्व मंत्री बलराम यादव को राष्ट्रीय कार्यकारिणी में जगह देकर इसका संकेत दे दिया है। कहा जा रहा है कि इस कड़ी में शिवपाल के दूसरे करीबियों के नाम भी हैं जो एक-एक कर योजनाबद्ध तरीके से सामने आ सकते हैं। इस कड़ी में अगला नंबर विधानसभा चुनावों में सपा छोड़कर बसपा में जाने वाले और हाल ही में बसपा को भी अलविदा कहने वाले नारद राय का कहा जा रहा है। इसे समाजवादी पार्टी को फिर से युनाइट करने का अखिलेश यादव का सीक्रेट प्लान बताया जा रहा है। पूर्वांचल में खासतौर से गाजीपुर, बलिया, आजमगढ़ और मऊ जिले में सपा को मजबूत बनाने की कवायद कही जा रही है।
राष्ट्रीय कार्यकारिणी से चाचा शिवपाल सिंह यादव को दूर रखकर अखिलेश ने ये साफ कर दिया कि उनका इरादा क्या है। उन्होंने पूर्व मंत्री और चाचा के करीबी बलराम यादव को कार्यकारिणी में जगह देकर सबको चौंका दिया। पर यह तो शुरुआत है, पूर्वांचल की सियासत को फिर से अपने कब्जे में करने के लिये अखिलेश यादव अभी ऐसे और फैसले ले सकते हैं ऐसा सूत्र बताते हैं। शिवपाल सिंह यादव से झगड़े के बाद अखिलेश यादव ने उनके करीबियों को किनारे कर दिया था। इसमें बलिया में अम्बिका चौधरी, नारद राय और गाजीपुर में ओम प्रकाश सिंह व शादाब फातिमा का नाम सबसे ऊपर था।
बलराम यादव को ओहदा देने के बाद अब नारद राय को सपा में शामिल किया जा सकता है। नारद राय ने अभी हाल ही में बहुजन समाज पार्टी से इस्तीफा दिया है। यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान शिवपाल का करीबी होने के नाते उनका टिकट काट दिया गया था, जिसके बाद उन्होंने बसपा का दामन थामा था। अब बसपा से अलग होने के बाद खुद नारद राय के फिर से सपा में जाने की बात कही जा रही है, राय भी इस बात से इनकार नहीं करते। सूत्रों के मुताबिक दिवाली बाद उनको लेकर कोई ऐलान हो सकता है। हालांकि नारद राय विधानसभा चुनाव हार गए पर वह जनाधार वाले नेता कहे जाते हैं।
पूर्व मंत्री और सपा के बड़े नेता रहे ओम प्रकाश सिंह को भी शिवपाल के करीबी होने का खामियाजा भुगतना पड़ा था। वह भी एक तरह से उपेक्षित थे। पर अब अखिलेश के नए प्लान के तहत उन्हें भी हाशिये से उठाकर पार्टी की मेन स्ट्रीम में लाया जा सकता है। खुद सपा के नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी गाजीपुर के सेवराई में गए और उन्होंने वहां ओम प्रकाश सिंह की तारीफ की। ओम प्रकाश ने भी खुद को क्षेत्र का वारिस तक कह डाला। ये बात यूं ही नहीं कही गयी। गाजीपुर की सियासत में चर्चा है कि ओम प्रकाश को फिर से महासचिव बनाया जा सकता है। इसके अलावा एक और चर्चा है कि ओम प्रकाश सिंह गाजीपुर से सांसद प्रत्याशी बनाए जा सकते हैं। इस बाबत सवाल करने पर उन्होंने पत्रिका प्रतिनिधि इस बात को नकारा नहीं, हां ये जरूर कहा कि नेता हैं तो चर्चा होनी ही चाहिये।
कुल मिलाकर देखें तो गाजीपुर और बलिया में 2019 के पहले सपा को ऐसे नेता की जरूरत है जिसकी जमीन मजबूत हो और वह पार्टी का बड़ा नाम हो। गाजीपुर में ओम प्रकाश सिंह से बड़ा नाम कोई नहीं और नारद राय का कद भी बलिया की राजनीति में किसी से कम नहीं। ये दोनों शिवपाल के विश्वासपात्र जरूर रहे पर अब जिस तरह से सियासत ने करवट बदली है इनकी प्राथमिकताएं भी बदली हैं। बदले परिदृष्य में अखिलेश यादव अगर इन पर दोबारा नजरे करम कर रहे हैं तो इसे सियासी शुद्धीकरण कहा जा सकता है। अब देखना ये होगा कि अखिलेश की नजर शिवपाल के और कितने करीबियों पर है और वह उन्हें कैसे अपना विश्वासपात्र बनाते हैं।
Published on:
17 Oct 2017 10:29 pm
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