कैंट रेलवे स्टेशन से लगभग सात किलोमीटर की दूर पर स्थित सारनाथ के पास ही सारंगनाथ मंदिर है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर को शिव का ससुराल माना जाता है। प्रचलित कहानी के अनुसार महादेव का विवाह राजा दक्ष की बेटी सती से हुआ था। सती के बड़े भाई ऋषि सारंग शादी के साथ वहां पर उपस्थित नहींं थे। जब ऋषि सारंग वापस लौटे तो उन्हें शादी की जानकारी हुई। ऋषि को पता चला कि उनकी बहन की शादी कैलाश पर रहने वाले औघड़ से की गयी है तो वह नाराज हो गये। उन्हें लगा कि उनके जीजा के पास ठीक से वस्त्र तक नहीं है। इसके बाद उन्होंने पता किया तो जानकारी मिली कि बहन सती व महादेव विलुप्त नगरी काशी में विचरण कर रहे हैं। इसके बाद सारंग ऋषि बहुत सा धन लेकर अपनी बहन से मिलने के लिए निकले थे। जहां पर आज सारंगनाथ का मंदिर है वहां पर पहुंचे तो थक जाने के कारण उन्हें नींद आ गयी। सारंग ऋषि ने सपना देखा कि काशी नगरी तो सोने से बनी हुई हे। इसके बाद उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ और बहनोई के बारे में क्या-क्यो सोचने को लेकर उन्हें ग्लानी भी हुई। इसके बाद उन्होंने प्रण किया कि वह अब यही रह कर बाबा विश्वनाथ की तपस्या करेंगे।
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