
वाराणसी. शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी-2018) में बनारस में कुल साढ़े पांच हजार अभ्यर्थियों ने इम्तहान छोड़ दिया। हालांकि इसका बड़ा कारण जिले की ध्वस्त ट्रैफिक व्यवस्था और केंद्र निर्धारण में असंतुलन भी बड़ा कारण बताया जा रहा है। जहां तक पेपर का सवाल है तो दोनों ही पालियों में गणित के प्रश्नों ने जहां अभ्यर्थियों को काफी उलझाया तो शेष प्रश्न आसान रहे।
जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार बनारस में सुबह की पाली यानी प्राथमिक शिक्षक पात्रता के लिए कुल 40 हजार 929 अभ्यर्थी पंजीकृत थे जिसमें से 37 हजार 657 ने परीक्षा दी जबकि तीन हजार 272 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे। वहीं शाम की पाली यानी उच्च प्राथमिक शिक्षक पात्रता के लिए कुल 23 हजार 634 अभ्यर्थी पंजीकृत थे जिसमें से 21 हजार 386 उपस्थित रहे जबकि दो हजार 248 ने परीक्षा छोड़ दी। बता दें कि इतनी बड़ी तादाद में अभ्यार्थियों के परीक्षा से अनुपस्थित रहने के पीछे बनारस का ट्रैफिक सिस्टम और केंद्र निर्धारण में असंतुलन बड़ा कारण रहा। बता दें कि पत्रिका ने शनिवार को ही यह आशंका जताई थी कि जिस तरह से केंद्रों का निर्धारण किया गया है उसमें परीक्षा छूटनी तय है। दरअसल अभी तक ऐसा होता रहा कि ऐसे अभ्यर्थी जिन्होंने दोनों पाली की परीक्षा के लिए आवेदन किया होता था उनका सेंटर एक ही होता रहा। ऐसे में एक बार केंद्र पर पहुंचने के बाद वो निश्चिंत हो जाते थे। पहली पाली की परीक्षा के बाद वो वहीं केंद्र के बाहर अपना समय काट कर दूसरी पाली की परीक्षा दे देते थे। लेकिन इस बार दोनों पालियों के लिए अलग-अलग सेंटर बनाए गए थे। एक शहर में तो दूसरा गांव के केंद्र में परीक्षा देने जाना था। वह भी बनारस की ट्रैफिक को झेलते हुए। इस सूरत में परीक्षा छूटना तय माना जा रहा था। यही नहीं बनारस में एक सेंटर परीक्षा से तीन दिन पहले बदल दिया गया था उससे भी अभ्यर्थियों को खासी परेशानी झेलनी पड़ी। ट्रैफिक के तो इतने अच्छे इंतजाम थे कि केंद्रों के सामने जहां अभ्यर्थियों की कतार लगी थी वहां मवेशी से लेकर ठेला, रिक्शा, सहित अन्य वाहनों का आवागमन जारी रहा। ये तब था जब जिला प्रशासन की ओर से परीक्षा को अति महत्वपूर्ण मानते हुए काफी गंभीरता से लिया गया था।
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जहां तक प्रश्नों का सवाल है तो अभ्यर्थियों ने पत्रिका को बताया कि ओवर ऑल पेपर तो ठीक रहा। बस कला, वाणिज्य आदि के अभ्यर्थियों के लिए गणित के प्रश्न उलझाऊ रहे। सुनीता शर्मा जिन्होंने संस्कृत को वैकल्पिक विषय के रूप में चुना था उनका कहना था कि हिंदी, संस्कृत व अन्य प्रश्न तो ठीक थे, जैसी तैयारी थी उसके हिसाब से उत्तर दे दिया गया। हिंदी और संस्कृत में व्याकरण के सवाल ज्यादा थे जिसे हल करने में खास दिक्कत नहीं हुई पर गणित के प्रश्न उलझाऊ थे। वहीं पंकज मिश्र ने बताया कि ओवर ऑल पेपर ठीक रहा। ममता सहित अन्य अभ्यर्थियों का कहना था कि आसान सा पेपर दे कर परीक्षा केंद्र से बाहर निकलने के बाद अभ्यर्थियों को एक डर सता रहा था कि पेपर आसान आया है तो मेरिट भी ऊपर जाएगी।
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