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अहिंसा की सच्ची मिसाल: UN में भारत ने हीरो पायलट कैप्टन स्मित मच्छार को किया सलाम, PM मोदी की बातचीत का किया जिक्र

UN में हरीश पर्वतनेनी ने कैप्टन स्मित मच्छार के साहस का उल्लेख किया और उनके काम को गांधी के अहिंसा सिद्धांत का सच्चा उदाहरण बताया।
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India at UN

UN में भारत ने बताया, कैप्टन मच्छार का काम है अहिंसा का उदाहरण, photo source@ANI

UN Security Council 2028-29: संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वथानेनी ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार के बीच हुई बातचीत का जिक्र किया। कैप्टन मच्छार ने दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान के दौरान अपने ही को-पायलट के हमले को अपनी बहादुरी से नाकाम कर दिया था और 180 लोगों की जान बचाई थी। पर्वथानेनी ने कहा कि पायलट का यह साहसी काम महात्मा गांधी के 'अहिंसा' के सिद्धांत का सच्चा उदाहरण है।
महात्मा गांधी की जयंती के उपलक्ष्य में 'अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस' मनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, पर्वथानेनी ने राष्ट्रपिता के शांति, अहिंसा, मानवीय गरिमा और विकास के सिद्धांतों की आज भी बनी हुई अहमियत पर जोर दिया।

हमले के बावजूद सुरक्षित पहुंचाई उड़ान

पर्वथानेनी ने कहा कि पायलट ने जान जोखिम में डालकर बड़ी संख्या में यात्रियों को बचाया और विमान सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित उतरा। उनके मुताबिक पीएम मोदी ने कैप्टन मच्छार से कहा कि गांधी जयंती और अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस पर उनका काम अहिंसा का सच्चा उदाहरण है। हमले का शिकार होने के बावजूद उन्होंने बहादुरी से यह सुनिश्चित किया कि सभी यात्री सुरक्षित रहें।

वीडियो कॉल पर भावुक हुए कैप्टन

इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने वीडियो कॉल पर कैप्टन मच्छार के साहस, सूझबूझ और संयम की तारीफ की। उन्होंने कहा कि पूरा देश उनके लिए प्रार्थना कर रहा था। बातचीत के दौरान कैप्टन भावुक हो गए।

पर्वथानेनी ने कहा कि दुनिया भर के संघर्षों और अस्थिरता के बीच गांधी का संदेश मार्गदर्शक है। उनके अनुसार गांधी ने पहचाना कि हिंसा सिर्फ युद्ध में नहीं, गरीबी, शोषण और असमानता में भी होती है। उन्होंने सर्वोदय के दृष्टिकोण को समावेशी, न्यायसंगत और टिकाऊ विकास की मांग से जोड़ा। साथ ही गांधी की पर्यावरण जागरूकता और आत्मनिर्भरता की वकालत को आज भी प्रासंगिक बताया।

सुरक्षा परिषद की दावेदारी से जुड़ा संदेश

उन्होंने गांधी के सिद्धांतों को 2028-29 के लिए UN सुरक्षा परिषद की सीट के लिए भारत की प्राथमिकताओं से जोड़ा, जिसका आदर्श वाक्य शांति है। उन्होंने इसका अर्थ बताया, मानकों, विश्वास और ईमानदारी के माध्यम से समग्र प्रगति सुनिश्चित करना।