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गिलगित-बाल्टिस्तान में लोकतंत्र कुचल रहा पाकिस्तान, UNHRC में कश्मीरी एक्टिविस्ट का धमाकेदार खुलासा

कश्मीरी मानवाधिकार कार्यकर्ता जावेद अहमद बेग ने UNHRC के 63वें सत्र में पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में AAC-GB नेताओं की हिरासत का मुद्दा उठाया। जानें एडवोकेट एहसान अली सहित कार्यकर्ताओं पर लगे आरोपों और UN से की गई अपील की पूरी डिटेल।
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Pakistan occupied Kashmir

गिलगित-बाल्टिस्तान में पाकिस्तान के दमन का UNHRC में गूंजा आक्रोश, photo source@ANI

Human Rights Violation Pakistan: जम्मू-कश्मीर के सोशल वर्कर और मानवाधिकार कार्यकर्ता जावेद अहमद बेग ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 63वें सत्र में गिलगित-बाल्टिस्तान की अवामी एक्शन कमेटी (AAC-GB) के सदस्यों - जिनमें इसके चेयरमैन एडवोकेट एहसान अली भी शामिल हैं - को लगातार हिरासत में रखे जाने का मुद्दा उठाया।

परिषद को संबोधित करते हुए बेग ने कहा कि एडवोकेट एहसान अली और AAC-GB के कई अन्य सदस्यों को तीन महीने से ज्यादा समय से हिरासत में रखा गया है। उन्होंने 70 वर्षीय वकील एहसान अली को AAC-GB का चेयरमैन बताया।

विरोध को बताया जा रहा अपराध

बेग ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में जायज विरोध-प्रदर्शनों को अपराध की श्रेणी में डाल दिया है और बुनियादी अधिकारों की आवाज उठाने वाले कार्यकर्ताओं के खिलाफ, धार्मिक, व्यापारिक और छात्र संगठनों का एक समूह है, जो इस क्षेत्र के लोगों के बुनियादी अधिकारों के लिए काम करने वाला एक प्रमुख गैर-राजनीतिक संगठन है।

चौथी अनुसूची के तहत कार्यकर्ता नजरबंद

बेग के मुताबिक, एहसान अली के साथ ही उनके साथी कार्यकर्ता नुसरत हुसैन, महबूब वली, नफीस एडवोकेट और मेहर अली को पाकिस्तान के आतंकवाद-रोधी कानूनों की चौथी अनुसूची (Fourth Schedule) के तहत रखा गया है और उन पर हिंसा भड़काने का आरोप मढ़ा गया है। बेग ने इन आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए कहा कि क्षेत्र की सिविल सोसाइटी ने भी इसकी निंदा की है।

दमन, यातना और डराने-धमकाने के आरोप

बेग ने आगे आरोप लगाया कि इन कार्यकर्ताओं की हिरासत क्षेत्र में लोकतांत्रिक अधिकारों की बिगड़ती स्थिति को दर्शाती है, जहां शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन आयोजित करने को भी आपराधिक कृत्य माना जा रहा है। उनके अनुसार, पाकिस्तानी प्रशासन असहमति की आवाज को दबाने के लिए सख्त कानूनों, बल प्रयोग, यातना और धमकी का सहारा ले रहा है।

तत्काल रिहाई की अपील

इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित करते हुए बेग ने मानवाधिकार परिषद से हिरासत के मामले का गंभीरता से संज्ञान लेने और आतंकवाद-रोधी कानूनों के कथित दुरुपयोग को रोकने की अपील की। उन्होंने UN मानवाधिकार परिषद से पाकिस्तान पर दबाव बनाकर हिरासत में लिए गए सभी AAC-GB सदस्यों की तुरंत रिहाई और मनमानी हिरासत व राजनीतिक दमन की स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करने की मांग की।