
Iraq US military withdrawal: इराक से अमेरिकी सैनिकों की वापसी पर ईरान का बयान, कानी ने बताया नया दौर (फोटो सोर्स:@mehrnews)
Iran US tensions: ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से जारी टकराव का असर अब पश्चिम एशिया की बदलती रणनीतिक तस्वीर में भी दिखाई देने लगा है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की कुद्स फोर्स के कमांडर इस्माइल कानी ने क्षेत्र में अमेरिकी प्रभाव को लेकर बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि हालिया युद्ध के बाद मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन बदला है और इराक से अमेरिकी सैनिकों की वापसी तथा लेबनान में हिजबुल्लाह की मौजूदगी को वे इसी बदलाव का संकेत मानते हैं।
ईरान की कुद्स फोर्स के प्रमुख इस्माइल कानी ने दावा किया है कि क्षेत्र में अमेरिका को मौजूदा परिस्थितियों में बेहद कठिन स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। ईरानी मीडिया के मुताबिक, उन्होंने इसे अमेरिका के लिए “अपमानजनक स्थिति” बताया और कहा कि यह बदलाव लेबनान से लेकर इराक तक देखा जा सकता है।
समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, कानी ने पश्चिम एशिया में अमेरिकी वर्चस्व के खिलाफ प्रतिरोध के एक नए दौर की बात कही। उनके बयान में हालिया युद्ध के बाद क्षेत्रीय समीकरणों में आए बदलाव को खास तौर पर रेखांकित किया गया।
कानी के बयान का सबसे अहम हिस्सा इराक में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपनी सैन्य क्षमताओं के साथ इराक से बाहर हो चुका है। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अमेरिका ने इराक में इस्लामिक स्टेट यानी ISIL/ISIS के खिलाफ चल रहे मिशन से जुड़े अपने अंतिम सैनिकों की वापसी पूरी कर ली है।
अमेरिकी रक्षा विभाग ने बुधवार को अंतिम अमेरिकी सैनिकों के इराक से निकलने की पुष्टि की। इसके साथ वहां अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को समाप्त करने की वर्षों से चल रही प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में पहुंची।
हालांकि, सैनिकों की वापसी को केवल ईरान के दावे के नजरिए से देखना पूरी तस्वीर नहीं बताता। अमेरिका की इराक नीति आतंकवाद विरोधी अभियान, इराकी सुरक्षा बलों की क्षमता और क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था जैसे कई पहलुओं से जुड़ी रही है।
कानी ने लेबनान का जिक्र करते हुए हिजबुल्लाह को भी अपने बयान के केंद्र में रखा। उन्होंने कहा कि संगठन ने दबाव के बावजूद अपनी स्थिति बनाए रखी। यह टिप्पणी उन दावों के संदर्भ में आई, जिनमें अमेरिका और इजरायल की ओर से हिजबुल्लाह की सैन्य क्षमता पर गंभीर असर पड़ने की बात कही गई थी।
ईरान लंबे समय से हिजबुल्लाह को क्षेत्रीय प्रतिरोध के महत्वपूर्ण हिस्से के तौर पर देखता रहा है। ऐसे में कानी का बयान केवल सैन्य घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि तेहरान की व्यापक क्षेत्रीय रणनीति का संदेश भी माना जा रहा है।
पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैनिकों की भूमिका, ईरान-समर्थित समूहों की गतिविधियां और इजरायल के साथ जारी तनाव आने वाले समय में क्षेत्रीय समीकरणों को प्रभावित करने वाले प्रमुख मुद्दे बने रह सकते हैं।
Updated on:
02 Oct 2026 07:25 am
Published on:
02 Oct 2026 07:18 am
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