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Iran US War: ईरान का दो टूक संदेश: जंग के लिए भी तैयार, बातचीत का दरवाजा भी खुला; होर्मुज पर अटका संकट

तेहरान और वॉशिंगटन के बीच तनाव फिर उस मोड़ पर पहुंच गया है, जहां एक तरफ सैन्य टकराव की आशंका बढ़ रही है तो दूसरी ओर बातचीत की गुंजाइश पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। सबसे बड़ा पेच रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है, जिस पर ईरान ने अपनी शर्तें साफ कर दी हैं।
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भारत

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Manoj Vashisth

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Sep 28, 2026

Iran US War, Iran America Tension,

Iran US War: ईरान-अमेरिका टकराव के बीच अराघची का बड़ा बयान (फोटो सोर्स: ANI)

Iran America Tension: ईरान और अमेरिका के बीच टकराव खत्म होने के बजाय नए मोड़ लेता दिखाई दे रहा है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ कर दिया है कि अगर अमेरिकी हमले दोबारा शुरू होते हैं तो तेहरान मुकाबले के लिए तैयार है। हालांकि इसी बयान में उन्होंने कूटनीति का रास्ता खुला रखने की बात भी कही। ऐसे में असली सवाल सिर्फ युद्ध की वापसी का नहीं, बल्कि होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और परमाणु वार्ता बहाल करने की शर्तों पर दोनों देशों के बीच सहमति का है।

Iran US War: युद्ध के लिए तैयारी, लेकिन बातचीत से इनकार नहीं

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को NBC News के कार्यक्रम “Meet the Press” में कहा कि उनका देश अमेरिका के साथ दोबारा युद्ध की स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने संकेत दिया कि किसी नए हमले की स्थिति में ईरान पीछे हटने वाला नहीं है। साथ ही अराघची ने यह भी कहा कि शांति की संभावना को खत्म करना उनके देश के हित में नहीं है।

समाचार एजेंसी के मुताबिक, अराघची ने कहा कि ईरान युद्ध और कूटनीति दोनों परिस्थितियों के लिए तैयार है। उनका बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिसमें सात दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और परमाणु वार्ता शुरू करने की बात कही गई थी।

होर्मुज पर क्यों टिकी दुनिया की नजर?

फारस की खाड़ी से वैश्विक ऊर्जा बाजार तक पहुंचने वाले प्रमुख समुद्री मार्गों में होर्मुज जलडमरूमध्य बेहद महत्वपूर्ण है। मौजूदा संघर्ष के दौरान यहां आवाजाही प्रभावित होने से तेल और गैस आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है। Reuters ने भी रिपोर्ट किया है कि ईरान अमेरिकी सैन्य दबाव और बंदरगाहों पर लगाए गए प्रतिबंधों में ढील की स्थिति में एक सप्ताह के भीतर मार्ग खोलने की पेशकश कर चुका है।

अराघची के मुताबिक, तेहरान चाहता है कि युद्ध खत्म हो, उसके फ्रीज किए गए धन तक पहुंच बहाल हो और उसे तेल बेचने की अनुमति मिले। ईरान का कहना है कि इन शर्तों पर प्रगति होने के बाद ही जलडमरूमध्य खोलने की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है।

ट्रंप की ओर से बातचीत का संकेत

दिलचस्प बात यह है कि प्रस्ताव खारिज करने के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सप्ताह ईरान के साथ और बातचीत की उम्मीद जताई है। इससे संकेत मिलता है कि सार्वजनिक बयानबाजी के बीच संपर्क के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। हालांकि दोनों पक्षों की शर्तों में बड़ा अंतर बना हुआ है।

इसी बीच ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अमेरिकी Remus 600 अंडरवाटर ड्रोन को कब्जे में लेने का दावा किया है। अमेरिकी पक्ष ने इस दावे को खारिज किया है, इसलिए इस घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

गाजा में भी हिंसा जारी है, जबकि पश्चिम एशिया के दूसरे हिस्सों में सैन्य तनाव और समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। ऐसे माहौल में ईरान-अमेरिका के बीच अगली बातचीत यह तय करने में अहम हो सकती है कि तनाव कम करने का रास्ता खुलेगा या संघर्ष फिर तेज होगा।