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179 साल की वेटिंग! भारतीयों के लिए ग्रीनकार्ड बना सपना, ट्रंप प्रशासन ने प्रवासियों पर कसी नई नकेल

Trump immigration policy: अमेरिका में प्रवासियों के लिए नया नियम लागू, घर बदलने पर 10 दिन में देनी होगी सूचना। जानें भारतीय पेशेवरों के लिए ग्रीनकार्ड की बढ़ती वेटिंग और EB-2, EB-3 श्रेणी के ताजा आंकड़े।
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US address change rule immigrants

अमेरिका में प्रवासियों के लिए नया नियम लागू, भारतीय पेशेवरों के लिए ग्रीनकार्ड की बढ़ती वेटिंग, photo source@ChatGpt

USCIS New Rule for Immigrants: अमेरिका में ट्रंप प्रशासन लगातार प्रवासियों के प्रति सख्त रुख बनाए हुए है। अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआइएस) ने प्रवासी नागरिकों को लेकर अब एक नया फरमान जारी किया है। इसके अनुसार अमरीका में रह रहे प्रवासियों को अपना पता बदलने पर 10 दिनों के भीतर इसकी जानकारी आव्रजन एजेंसी को देनी होगी।

पता बदलने की सूचना समय पर न देने पर नोटिस मिलने में देरी हो सकती है। इससे आव्रजन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। यह नियम अमरीका में रहने वाले सभी विदेशियों पर लागू होगा, जो अपना घर बदलते हैं। सूचना न देने पर यूएससीआइएस से जुड़ी डाक को आगे नहीं भेजा जाएगा। यह सूचना ए और जी वीजा धारकों और वीजा छूट प्राप्त आगंतुकों पर लागू नहीं होगी। इस प्रक्रिया को ऑनलाइन ही सेल्फ सर्विस टूल के जरिए पूरा किया जा सकता है।

ग्रीनकार्ड के लिए इंतजार और लंबा

इस बीच अमेरिका में रोजगार आधारित आव्रजन बैकलॉग 12 लाख से ज्यादा हो गया है। जॉर्ज डब्ल्यू. बुश इंस्टीट्यूट की सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार भारतीय पेशेवरों के लिए ईबी-2 ग्रीनकार्ड का इंतजार लगभग 179 साल तक पहुंच गया है। दिसंबर 2025 तक ग्रीनकार्ड की तीन श्रेणियों में करीब 10 लाख भारतीय बैकलॉग में थे, जो कुल बैकलॉग का 79 प्रतिशत है। इस तरह अमेरिका में रह रहे प्रवासियों, खासकर भारतीय पेशेवरों के लिए यह दोहरी चुनौती बन गई है। एक तरफ नए नियमों का पालन करने की सख्ती, तो दूसरी तरफ ग्रीनकार्ड के लिए दशकों लंबा इंतजार।

भारतीयों के लिए ग्रीनकार्ड की वेटिंग एक नजर में

  • ईबी-2 श्रेणी: 179 साल
  • ईबी-3 श्रेणी: लगभग 38 साल
  • ईबी-1 श्रेणी: 4 से 5 साल

भारतीयों के साथ अमेरिकी कंपनियों को भी परेशानी

ग्रीनकार्ड की इस लंबी वेटिंग से न सिर्फ भारतीय पेशेवरों के सामने बड़ी समस्या खड़ी कर दी है, बल्कि अमेरिकी कंपनियों में कर्मचारियों और विश्वविद्यालयों में छात्रों के लिए भी चुनौतियां बढ़ गई हैं। बताते चलें कि अमरीकी इमिग्रेशन कानून के तहत हर साल रोजगार-आधारित ग्रीनकार्ड की संख्या लगभग 1.40 लाख तक सीमित होती है। इसमें किसी भी एक देश के नागरिकों को एक साल में 7 प्रतिशत से ज्यादा कार्ड नहीं दिए जा सकते।