
54 गांवों पर पेयजल संकट (फोटो सोर्स- पत्रिका)
बेमेतरा@ राकेश तिवारी। Shivnath River Water Crisis: शिवनाथ नदी में 27 सितंबर को जहां नांदघाट की निचली बस्ती में नाव से निगरानी करनी पड़ रही थी, वहीं महज 11 दिन बाद 8 अक्टूबर को इंटकवेल तक पानी पहुंचाने के लिए कर्मचारियों को नदी में फावड़ा चलाना पड़ा। नांदघाट इंटकवेल से खारा पानी प्रभावित 54 गांवों में पेयजल की आपूर्ति होती है। नदी में पानी का स्तर घटने से इस बार समय से पहले ही संकट के संकेत मिलने लगे हैं।
पिछले वर्ष 15 नवंबर के बाद इंटकवेल तक पानी पहुंचाने के लिए अस्थायी व्यवस्था करनी पड़ी थी। इस बार अक्टूबर की शुरुआत में ही ऐसी स्थिति बन गई है। नांदघाट में शिवनाथ नदी के पुराने एनिकट में रिसाव की समस्या दूर करने जल संसाधन विभाग ने लंबे समय तक प्रयास किए, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो सका। नदी के दूसरे हिस्से में रेत उत्खनन से कटाव बढऩे और धारा की दिशा बदलने का भी असर पड़ा है।
पिछले वर्ष मिट्टी का अस्थायी बांध बनाकर पेयजल आपूर्ति बहाल की गई थी। जल संसाधन विभाग ने नांदघाट में करीब 12 करोड़ रुपए की लागत से नए एनिकट का प्रस्ताव भेजा है, लेकिन अब तक स्वीकृति नहीं मिली है। विभाग के अनुसार नदी के दूसरे हिस्से में कटाव रोकने का काम नवंबर से शुरू करने की तैयारी है। योजना को अनुपूरक बजट में शामिल कराने का प्रयास भी जारी है। बैराज निर्माण का प्रस्ताव भी पाइपलाइन में है।
नांदघाट इंटकवेल से करीब 54 गांवों की लगभग 70 हजार आबादी को पेयजल मिलता है। जल संसाधन विभाग के एसई सीएस शिवहरे ने कहा कि पेयजल आपूर्ति लगातार जारी रखने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। नवंबर में कटाव रोकने का काम शुरू होगा और एनिकट की योजना की स्वीकृति के लिए प्रयास जारी हैं।
बेमेतरा जिले के चारों ब्लॉक की बड़ी आबादी की पेयजल व्यवस्था शिवनाथ नदी पर निर्भर है। नदी में बाढ़ के दौरान नाव चलती है और कुछ ही दिनों बाद इंटकवेल तक पानी पहुंचाने के लिए फावड़ा चलाना पड़ रहा है। यह तस्वीर जल संरक्षण के दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर सामने लाती है। खारुन, हाफ, फोक, सकरी और सुरही जैसी नदियों का पानी शिवनाथ के रास्ते महानदी तक पहुंचता है। ऐसे में शिवनाथ का संरक्षण केवल एक नदी नहीं, पूरे जल तंत्र की जरूरत है।
Updated on:
09 Oct 2026 10:15 am
Published on:
09 Oct 2026 10:15 am
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