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मुस्लिम देश इंडोनेशिया में भी पूजे जाते हैं श्रीराम, भिलाई के आशीष दास के पास है रामायण के दुर्लभ डाक टिकटों का खजाना

Ramayana Postage Stamps: दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम बहुल देश इंडोनेशिया में भी भगवान श्रीराम और रामायण को सांस्कृतिक विरासत के रूप में सम्मान मिलता है।
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भिलाई

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Laxmi Vishwakarma

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Updated: 8 Nov 2026, 9:27 AM IST

Indonesia Ramayana

इंडोनेशिया में भी पूजे जाते हैं श्रीराम (Photo Source- Patrika)

Indonesia Ramayana: भारत में रामायण और भगवान श्रीराम का विशेष महत्व है, लेकिन श्रीराम की गाथा केवल भारत तक सीमित नहीं है। दुनिया के कई देशों में रामायण की कहानी, उसके पात्रों और आदर्शों को आज भी सांस्कृतिक विरासत के रूप में संजोकर रखा गया है। ऐसा ही एक देश इंडोनेशिया है, जहां रामायण की परंपरा सदियों से लोगों के जीवन और कला का हिस्सा बनी हुई है। खास बात यह है कि दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम बहुल देश इंडोनेशिया में भी भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान से जुड़ी परंपराओं को सम्मान दिया जाता है।

दीपावली के मौके पर छत्तीसगढ़ के भिलाई से रामायण की इसी वैश्विक पहचान से जुड़ी एक खास कहानी सामने आई है। भिलाई निवासी और भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) से सेवानिवृत्त अधिकारी आशीष कुमार दास के पास इंडोनेशिया सरकार की ओर से रामायण विषय पर जारी किए गए दुर्लभ स्मारक डाक टिकटों का संग्रह है। उनका यह संग्रह केवल डाक टिकटों का संकलन नहीं, बल्कि भारत और इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों की अनूठी झलक भी पेश करता है।

Indonesia Culture: इंडोनेशिया में रामायण को सांस्कृतिक विरासत का सम्मान

आशीष कुमार दास बताते हैं कि इंडोनेशिया भले ही दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम बहुल देश है, लेकिन वहां की संस्कृति में रामायण की गहरी छाप देखने को मिलती है। वहां रामायण को केवल धार्मिक कथा के तौर पर नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में भी देखा जाता है। इंडोनेशिया में रामायण की कहानी का मंचन, नृत्य और पारंपरिक कला के माध्यम से पीढ़ियों से किया जाता रहा है। वहां की प्रसिद्ध पारंपरिक नृत्य-नाट्य शैली में रामायण के प्रसंगों को विशेष स्थान प्राप्त है। भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण, हनुमान और रावण जैसे पात्र आज भी वहां की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का हिस्सा हैं।

मुस्लिम कलाकार निभाते हैं राम और रावण की भूमिका

इंडोनेशिया की रामायण परंपरा की सबसे खास बात यह है कि वहां मुस्लिम कलाकार भी रामायण आधारित नृत्य और नाटकों में हिस्सा लेते हैं। कलाकार भगवान राम, माता सीता, हनुमान और रावण जैसे पात्रों की भूमिका निभाते हैं। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से रामायण के आदर्शों और प्रसंगों को दर्शकों तक पहुंचाया जाता है। यह परंपरा बताती है कि किसी देश की सांस्कृतिक विरासत केवल धर्म तक सीमित नहीं होती। रामायण के आदर्श, चरित्र और कहानियां अलग-अलग समाजों में अपनी जगह बना सकती हैं। दीपावली के अवसर पर आशीष दास का यह संग्रह भारत और इंडोनेशिया के बीच इसी सांस्कृतिक जुड़ाव की याद दिलाता है।

बालिफेक्स 2019 में जारी हुए थे रामायण पर विशेष डाक टिकट

आशीष दास के संग्रह में इंडोनेशिया की ओर से रामायण विषय पर जारी किए गए विशेष स्मारक डाक टिकट और कवर शामिल हैं। इनमें बालिफेक्स 2019 का मुख्य स्मारक कवर, सॉविनियर शीट और पांच अलग-अलग दिवसों के विशेष कवर शामिल हैं। इन कवरों को रामायण के प्रमुख पात्रों के नाम पर तैयार किया गया था। हर दिन एक अलग पात्र को समर्पित किया गया, जिससे यह संग्रह और भी खास बन जाता है।

पांच दिनों में रामायण के पांच प्रमुख पात्रों को किया गया समर्पित

इस विशेष संग्रह में 13 नवंबर से 17 नवंबर तक पांच अलग-अलग दिवसों के कवर शामिल हैं। 13 नवंबर को श्रीराम दिवस के रूप में समर्पित किया गया। 14 नवंबर को सीता-राम दिवस, 15 नवंबर को लक्ष्मण दिवस, 16 नवंबर को हनुमान दिवस और 17 नवंबर को जटायु दिवस के नाम से विशेष कवर जारी किए गए। इन पांचों पात्रों का रामायण में महत्वपूर्ण स्थान है। भगवान राम मर्यादा और आदर्श के प्रतीक हैं, माता सीता धैर्य और त्याग का उदाहरण हैं, लक्ष्मण समर्पण के प्रतीक हैं, हनुमान भक्ति और सेवा का संदेश देते हैं, जबकि जटायु अन्याय के विरुद्ध संघर्ष और बलिदान की प्रेरणा देते हैं।

सीमित संख्या में जारी हुए थे विशेष कवर

आशीष कुमार दास के संग्रह की खासियत इसकी सीमित उपलब्धता भी है। उनके पास मौजूद सॉविनियर शीट पर 1541/3000 का नंबर दर्ज है। वहीं, विशेष कवर पर 161/200 अंकित है। इसका मतलब है कि संबंधित सॉविनियर शीट और कवर सीमित संख्या में जारी किए गए थे। फिलैटली यानी डाक टिकट संग्रह के शौकीनों के लिए ऐसे स्मारक कवर ऐतिहासिक और संग्रहणीय महत्व रखते हैं।

Rare Postage Stamps: डाक टिकटों में दर्ज है भारत-इंडोनेशिया के सांस्कृतिक रिश्तों का इतिहास

आशीष दास का यह दुर्लभ संग्रह बताता है कि भारत और इंडोनेशिया के संबंध केवल व्यापार और कूटनीति तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच भाषा, कला, साहित्य और परंपराओं के स्तर पर भी लंबे समय से जुड़ाव रहा है। रामायण की कहानी ने अलग-अलग देशों की संस्कृति में अपनी जगह बनाई है। इंडोनेशिया में इसके मंचन और डाक टिकटों के माध्यम से इसका सम्मान इसी साझा विरासत का उदाहरण है।

दीपावली के मौके पर भिलाई के आशीष कुमार दास का यह संग्रह एक खास संदेश देता है कि भगवान श्रीराम के आदर्श और रामायण की कथा भौगोलिक सीमाओं से कहीं आगे तक पहुंची है। डाक टिकटों के इस छोटे से संग्रह में भारत और इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक रिश्तों की बड़ी कहानी छिपी हुई है।