
Bhilwara Municipal Corporation Election Congress Ticket Controversy (Patrika File Photo)
Bhilwara Municipal Corporation Election Congress Ticket Controversy: भीलवाड़ा नगर निगम चुनाव के दौरान कांग्रेस के 17 वार्डों में प्रत्याशियों के सिंबल कटने और टिकट आवंटन में कथित गड़बड़ियों का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की ओर से गठित नौ सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति ने मामले में सख्त रुख अपनाया है। समिति ने भीलवाड़ा के प्रमुख कांग्रेस नेताओं को जयपुर तलब कर पूरे घटनाक्रम पर जवाब मांगा है। इस मामले में आगे संगठनात्मक कार्रवाई की संभावना को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
जांच समिति के समक्ष वरिष्ठ नेता डॉ. सीपी जोशी की मौजूदगी में शहर कांग्रेस अध्यक्ष जीपी खटीक, कांग्रेस नेता ओम नराणीवाल और चुनाव समन्वयक एवं प्रदेश कांग्रेस सचिव मुकेश वर्मा पेश हुए। समिति ने तीनों नेताओं से अलग-अलग (वन-टू-वन) मुलाकात कर उनका पक्ष सुना और पूरे घटनाक्रम को लेकर स्पष्टीकरण लिया। अब समिति मामले से जुड़े तथ्यों और नेताओं के बयानों के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व को सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदारी तय करने और आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जा सकता है।
निकाय चुनाव के दौरान नामांकन प्रक्रिया में भीलवाड़ा के कुल 70 वार्डों में से 17 वार्डों में कांग्रेस प्रत्याशियों को पार्टी के सिंबल नहीं मिल पाए थे। इस घटनाक्रम के बाद स्थानीय संगठन में नाराजगी फैल गई थी। सिंबल रोकने और टिकट आवंटन में अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए कई नेताओं ने संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। इससे पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष बढ़ गया और मामला स्थानीय राजनीति से निकलकर प्रदेश नेतृत्व तक पहुंच गया।
विवाद की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व ने मामले का संज्ञान लिया था। इसके बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. सीपी जोशी की अगुवाई में नौ सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की गई। समिति को पूरे घटनाक्रम की जांच कर सात दिन में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए थे।
जांच समिति अब पूरे मामले की कड़ियों को जोड़कर जिम्मेदारियों का आकलन कर रही है। जयपुर में प्रमुख नेताओं से पूछताछ के बाद भीलवाड़ा के राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है। माना जा रहा है कि समिति की रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रदेश नेतृत्व इस मामले में कड़ा रुख अपना सकता है। यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित नेताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल सभी की नजरें जांच रिपोर्ट और प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व के अगले कदम पर टिकी हैं।
Updated on:
11 Oct 2026 12:34 pm
Published on:
11 Oct 2026 12:34 pm
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