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पोर्टल पर 112 टॉयलेट पूरे, जमीन पर कहीं सीट तो कहीं दरवाजे गायब! एमपी कांग्रेस का बड़ा आरोप

Bhopal Government Schools : उमंग सिंघार ने पोस्ट किया कि, भोपाल के 124 सरकारी स्कूलों में गर्ल्स टॉयलेट के लिए 3.63 करोड़ मंजूर हुए। पोर्टल पर 112 टॉयलेट का काम पूरा दिखा दिया, लेकिन जमीन पर कहीं सीट-दरवाजे गायब तो कहीं निर्माण अधूरा पड़ा है।
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Bhopal Government Schools

उमंग सिंघार ने उउठाए सवाल (फोटो सोर्स: Umang Singhar Facebook)

Bhopal News :मध्य प्रदेश सरकार एक तरफ सांदीपनि विद्यालयों के जरिए छात्रों को इंटरनेशनल स्कूलों जैसी शिक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ सामान्य सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भोपाल के सरकारी स्कूलों में छात्राओं के लिए बनाए जाने वाले शौचालयों को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

उमंग सिंघार ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि, भोपाल के 124 सरकारी स्कूलों में गर्ल्स टॉयलेट निर्माण के लिए 3.63 करोड़ रुपए मंजूर किए गए थे।' उनके मुताबिक, 'सरकारी पोर्टल पर इनमें से 112 टॉयलेट का काम पूरा होने की बात कही गई है, जबकि जमीनी हकीकत इससे अलग है।'

कहीं टॉयलेट सीट नहीं तो कहीं दरवाजे गायब- सिंघार

नेता प्रतिपक्ष का आरोप है कि कई स्कूलों में शौचालय निर्माण अधूरा पड़ा है। कहीं टॉयलेट में सीट नहीं है तो कहीं दरवाजे तक गायब हैं। ऐसे में कागजों पर निर्माण कार्य पूरा दिखाए जाने के बावजूद छात्राओं को वास्तविक रूप से शौचालय की सुविधा नहीं मिल पा रही है।

'सरकार के सुशासन के दावों का क्या मतलब?'

सिंघार ने सरकार से सवाल उठाते हुए लिखा कि, 'जब 3.63 करोड़ रुपए की राशि छात्राओं के लिए बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराने के लिए मंजूर की गई थी तो उसका इस्तेमाल किस तरह किया गया है।' उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि, 'अगर पोर्टल पर काम पूरा दिखाया गया है और मौके पर निर्माण अधूरा है तो इसकी जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।' यही नहीं, उन्होंने मुख्यमंत्री से भी सवाल करते हुए कहा कि 'बेटियों की सुविधा के नाम पर अगर सिर्फ कागजी खानापूर्ति हो रही है तो सरकार के सुशासन के दावों का क्या मतलब है?'

गुणवत्ता पर सवाल

फिलहाल नेता प्रतिपक्ष के आरोपों के बाद सरकारी स्कूलों में बने इन शौचालयों की वास्तविक स्थिति और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मामले में सरकार या संबंधित विभाग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।